लद्दाख में आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक के NGO पर विदेशी फंडिंग की रोक। जानिए NGO क्या करता है, क्यों रद्द हुआ लाइसेंस और अब आगे क्या होगा।
लद्दाख के पर्यावरण और शिक्षा सुधारक, जिन्होंने युवाओं को व्यावहारिक और लोकल जरूरतों से जुड़ी शिक्षा देने की पहल की।
1994 में SECMOL की शुरुआत हुई, बाद में HIAL बना। दोनों संस्थाएं शिक्षा, पर्यावरण और जलवायु समाधान पर काम करती हैं।
विदेशी चंदा लेने के लिए सरकार से FCRA रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। नियम तोड़ने पर फंडिंग पर रोक लग सकती है।
सरकार का दावा है कि फंडिंग रिपोर्टिंग में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी मिली। इसी वजह से लाइसेंस कैंसिल किया गया।
विदेशी फंडिंग रुकी तो अब घरेलू डोनेशन, CSR या स्थानीय सपोर्ट से काम करना होगा।
संगठन स्पष्टीकरण देकर सुधारात्मक कदम उठा सकता है, गृह मंत्रालय को पुनर्विचार के लिए अपील कर सकता है या कोर्ट जा सकता है।