इंटरमिटेंट फास्टिंग सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं है। जानिए इसके फायदे, पैटर्न और महिलाओं व पुरुषों पर असर
यह एक डाइट पैटर्न है जिसमें खाने और फास्टिंग का समय तय होता है। इसका मकसद कैलोरी कम करना नहीं, बल्कि समय सीमित करना है।
16:8, 5:2 और ईट-स्टॉप-ईट पैटर्न सबसे ज्यादा अपनाए जाते हैं। इनसे मेटाबॉलिज्म सुधरता और वजन कंट्रोल में मदद मिलती है।
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है, फैट बर्न होता है, हॉर्मोनल बैलेंस में मदद मिलती है और ऑटोफैगी प्रक्रिया सक्रिय होती है।
पुरुषों में वजन घटाने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में तेज असर दिखता है। टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ता और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
महिलाओं के लिए लंबे फास्टिंग से हॉर्मोनल इम्बैलेंस हो सकता है। छोटे पैटर्न जैसे 12:12 या 14:10 ज्यादा सुरक्षित हैं।
डॉक्टर की सलाह लें, हाइड्रेशन पर ध्यान दें और कमजोरी या चक्कर महसूस होने पर फास्टिंग रोक दें।