भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सिर्फ अपनी प्रतिभा से नहीं, बल्कि अपनी सादगी और ईमानदारी से भी लोगों के दिलों में बसते हैं। जानिए, जब वे राष्ट्रपति बने तो उनके साथ कितना सामान था और क्यों आज भी उनकी जिंदगी से हर कोई प्रेरणा
15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में जन्मे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी सादगी और कर्म से देश का दिल जीता। आज उनकी जयंती वर्ल्ड स्टूडेंट डे के रूप में मनाई जाती है।
जब कलाम 2002 में राष्ट्रपति बने, तो सबको उम्मीद थी कि उनका बड़ा काफिला आएगा। लेकिन वे सिर्फ दो सूटकेस लेकर पहुंचे – जिनमें थीं कुछ किताबें और कपड़े।
वैज्ञानिक से लेकर राष्ट्रपति बनने तक, डॉ. कलाम ने कभी निजी संपत्ति नहीं जोड़ी। उन्होंने जो भी कमाया, वो शिक्षा और समाज के काम आया।
कलाम जहां भी काम करते, वहीं के सरकारी गेस्ट हाउस में रहते। न कभी आलीशान घर लिया, न निजी विलासिता अपनाई। यही थी उनकी सच्ची पहचान।
2007 में कार्यकाल खत्म होने पर कलाम वही दो सूटकेस लेकर राष्ट्रपति भवन से निकले। उन्होंने कुछ भी अपने पास नहीं रखा, बस सम्मान और प्रेरणा छोड़ दी।
15 अक्टूबर को भारत में वर्ल्ड स्टूडेंट डे मनाया जाता है। यह दिन कलाम की उस सोच को समर्पित है, जो हर छात्र को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती है।