कोणार्क सूर्य मंदिर: ओडिशा की स्थापत्य और पौराणिक धरोहर

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित अद्भुत स्थल है। जानें इसकी पौराणिक कथा और वास्तुकला के रहस्य।

सूर्य देव का प्राचीन मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी में गंगा वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया।

सांम्ब और सूर्य देव की कथा

अर्जुन के पुत्र साम्ब ने सूर्य देव की कृपा पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे मंदिर का निर्माण प्रेरित हुआ।

सात घोड़ों वाला विशाल रथ

मंदिर सूर्य देव के रथ का प्रतीक है और इसमें 24 पहिए हैं जो दिन और हिंदू कैलेंडर के महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अद्भुत वास्तुकला और नक्काशी

पत्थर की नक्काशी में देवी-देवताओं, जीव-जंतुओं और जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है।

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

सूर्य की पहली किरणें गर्भगृह में मूर्ति पर पड़ती हैं, जिससे मंदिर का आध्यात्मिक और स्थापत्य महत्व बढ़ जाता है।

विश्व धरोहर और पर्यटन आकर्षण

UNESCO ने 1984 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं।

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