1398 में दिल्ली की ओर बढ़ते तैमूर के सामने मेरठ किले के कोतवाल आलाशर ने अदम्य साहस दिखाया और देश की रक्षा के लिए मुकाबला किया।
तैमूर की फौज दिल्ली की ओर बढ़ रही थी, लेकिन कोतवाल आलाशर ने किले पर कब्जा नहीं देने दिया और सीधे मुकाबले के लिए तैयार हो गया।
तैमूर ने कहा, तुझे लोहे के पिंजरे में बंद कर जिंदा जलाऊंगा, लेकिन आलाशर ने डरने के बजाय लड़ाई स्वीकार की।
आलाशर ने कहा, देश के लिए जिंदा जलना भी सम्मान है, और अपने सैनिकों के साथ किले की रक्षा करने के लिए तैयार रहा।
तैमूर के सैनिक हाथियों की ताकत और किले से बरसते पत्थरों से डर गए, लेकिन आलाशर और उसके सैनिक पीछे नहीं हٹے।
तैमूर ने सुरंग खोदकर बारूद भरा और धमाके किए, जिससे किले की सुरक्षा ध्वस्त हो गई और आलाशर कैद में आ गया।
जिंदा जलाए जाने से पहले तेज बारिश ने आग बुझा दी और आलाशर को तैमूर की कैद में सुरक्षित रखा गया।