8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों और पेंशनर्स की नई सैलरी तय करेगा। अधिक फिटमेंट फैक्टर से बेसिक सैलरी और पेंशन बढ़ेगी। नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी, एरियर जुलाई 2027 तक आएगा।
New Delhi: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर हो रही है। बढ़ी हुई सैलरी (Salary Hike 2026) के सवाल का सीधा जवाब यही है कि फिटमेंट फैक्टर तय करता है कि मौजूदा बेसिक सैलरी कितनी बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार जितना अधिक फिटमेंट फैक्टर, उतनी अधिक सैलरी और पेंशन।
फिटमेंट फैक्टर क्या है
फिटमेंट फैक्टर एक गुणांक (Multiplier) है जिसे मौजूदा बेसिक सैलरी पर लगाया जाता है और नई बेसिक सैलरी तय होती है। उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.64 तय होता है, तो नई सैलरी होगी ₹18,000 × 2.64 = ₹47,250। इसी तरह यदि मौजूदा बेसिक सैलरी ₹50,000 है तो नई सैलरी होगी ₹50,000 × 2.64 = ₹1,32,000।
इस बार फिटमेंट फैक्टर के संभावित विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार तीन फिटमेंट फैक्टर पर विचार किया जा सकता है। 2.13 को 'नो प्रॉफिट, नो लॉस' वाला माना जा रहा है। 2.64 को न्यूनतम ठीक-ठाक फिटमेंट फैक्टर माना जा रहा है। 2.8 या उससे अधिक तब संभव है, जब परिवार की यूनिट की गणना 3 से बढ़ाकर 5 की जाए।
फिटमेंट फैक्टर किन फैक्टर्स पर निर्भर करता है
फिटमेंट फैक्टर महंगाई, जीवन यापन की लागत, CPI और CPI-IW आंकड़े, सरकार की वित्तीय स्थिति और बजट, कुल वेतन खर्च की सीमा, प्राइवेट सेक्टर की सैलरी, इंडस्ट्री वेतन सर्वे और परिवार की संरचना पर आधारित होता है। ये सभी फैक्टर्स तय करते हैं कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी।
फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है
वेतन आयोग सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों को आधार बनाता है। कर्मचारी + पत्नी/पति + 2 बच्चे को कुल तीन यूनिट माना जाता है। प्रत्येक यूनिट का खर्च, जिसमें खाना, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट और न्यूनतम सामाजिक जरूरतें शामिल हैं, महीने के हिसाब से जोड़कर न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है। इसके बाद अन्य लेवल की सैलरी और डीए तय होते हैं।
बढ़ी हुई सैलरी कब से लागू होगी
8वें वेतन आयोग के अनुसार नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से ड्यू मानी जाती है। लेकिन रिपोर्ट तैयार करना, कैबिनेट मंजूरी और नियम लागू करने में 18 से 24 महीने लग सकते हैं। इसका मतलब है कि कर्मचारियों के अकाउंट में बढ़ी सैलरी 1 जुलाई 2027 या 1 जनवरी 2028 से आ सकती है।
क्या सरकार जल्दी प्रक्रिया पूरी कर सकती है
विशेषज्ञों के अनुसार अगर सरकार चाहे तो 6-7 महीने में ही प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। लेकिन संकेत बताते हैं कि इसे चुनावी कैलेंडर से जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए जुलाई 2027 से सैलरी बढ़ोतरी की संभावना अधिक है।
देरी से कर्मचारियों को नुकसान
यदि नई बेसिक सैलरी समय पर लागू होती, तो कर्मचारी दो साल से अधिक सैलरी प्राप्त कर चुके होते। देरी के कारण लेवल-8 के कर्मचारी को करीब 30-35 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है क्योंकि एरियर के रूप में एचआरए और ट्रांसपोर्ट अलाउंस नहीं मिलते।










