कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के दावे के बाद पीएम मोदी पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि मोदी की असहजता के कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरा नहीं हो पाया। रमेश ने इसे सोशल मीडिया पर हिंदी श्लोक के साथ साझा किया।
New Delhi: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के हालिया दावे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। लटनिक के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण व्यापार समझौता इसलिए पूरा नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। रमेश ने इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति में विफलता बताते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और सोशल मीडिया पर एक हिंदी श्लोक साझा किया, जिसमें उन्होंने पूछा, “हग हग ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा, क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे दोस्ती में।”
हॉवर्ड लटनिक के दावे का सार
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी हो चुकी थी और सौदे की संरचना तैयार थी। लेकिन अंतिम चरण में नेतृत्व स्तर की भागीदारी आवश्यक थी। लटनिक ने स्पष्ट किया कि यह सौदा अमेरिकी राष्ट्रपति का था और अंतिम निर्णय उन्हें लेना था। उन्होंने कहा कि सब कुछ तैयार था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को कॉल करने में असहजता महसूस की।

लटनिक ने बताया कि उसी सप्ताह अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ नए व्यापार सौदे किए। उन्होंने इसे ट्रंप की व्यापार रणनीति का हिस्सा बताया, जिसमें पहले आगे आने वाले देशों को सर्वोत्तम शर्तें मिलती थीं, जबकि बाद में आए देशों को अधिक दरें लागू की जाती थीं।
व्यापार समझौते पर भारत का स्थान
लटनिक ने यह भी कहा कि यूनाइटेड किंगडम के साथ पहले व्यापार समझौते के दौरान बार-बार पूछा गया कि अगला देश कौन सा होगा, और भारत का नाम कई बार सामने आया। इस रणनीति को उन्होंने "सीढ़ीनुमा" मॉडल बताया। इसका मतलब था कि भारत को सौदा हासिल करने का अवसर था, लेकिन अंतिम कदम के लिए नेतृत्व स्तर का संपर्क जरूरी था।
जयराम रमेश का व्यंग्य
जयराम रमेश ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इसे जनता तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकार की विदेश नीति और नेतृत्व के नजरिए पर सवाल उठाता है। उनके श्लोक ने यह दर्शाया कि जो पहले मित्रवत स्थिति में था, अब उससे निराशा और कटुता उत्पन्न हो गई है।
व्यापार समझौते की वैश्विक रणनीति
हॉवर्ड लटनिक ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन ने देशों को अलग-अलग दरों और शर्तों पर व्यापार समझौते का अवसर दिया। जिन देशों ने पहले आगे बढ़कर बातचीत की, उन्हें सर्वोत्तम लाभ मिला। यह रणनीति वैश्विक व्यापार वार्ता में दबाव बनाने और देशों को प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में रखने की थी।













