एशियन गेम्स 2023 में भारत को पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक दिलाने वाले शॉटगन निशानेबाज अंगद वीर सिंह बाजवा ने कनाडा की नागरिकता ले ली है और अब वह आगामी एशियन गेम्स में कनाडा का प्रतिनिधित्व करेंगे।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय खेल जगत से एक अहम खबर सामने आई है। एशियन गेम्स 2023 में भारत को पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक दिलाने वाले शॉटगन निशानेबाज अंगद वीर सिंह बाजवा ने अब कनाडा की नागरिकता हासिल कर ली है। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जिसमें आगामी एशियन गेम्स भी शामिल हैं, में वह कनाडा का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। अंगद ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस फैसले की पुष्टि की है।
एनआरएआई से मिली NOC, रास्ता हुआ साफ
अंगद बाजवा को भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी जारी कर दी गई है। एनओसी मिलने के बाद अब वह बिना किसी कानूनी या प्रशासनिक बाधा के कनाडा के लिए अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं। एनआरएआई के महासचिव पवन सिंह ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संघ को अंगद का आवेदन प्राप्त हुआ था और नियमों के तहत उन्हें एनओसी देना जरूरी था। उन्होंने साफ कहा कि खिलाड़ी को रोकना संभव नहीं था, क्योंकि यह उसका व्यक्तिगत फैसला है।
अंगद बाजवा भारत के उन चुनिंदा निशानेबाजों में शामिल रहे हैं जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा एशियन गेम्स 2023 में उन्होंने पुरुष टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत रहा और वह शॉटगन शूटिंग में भारत के भरोसेमंद नामों में गिने जाते थे।

क्यों बदली नागरिकता? आधिकारिक वजह नहीं आई सामने
अंगद बाजवा ने सार्वजनिक रूप से अपनी नागरिकता बदलने की स्पष्ट वजह नहीं बताई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका पूरा परिवार लंबे समय से कनाडा में रह रहा है। उनके पिता गुरपाल बाजवा कनाडा में हॉस्पिटैलिटी बिजनेस से जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि पारिवारिक स्थायित्व, ट्रेनिंग सुविधाएं और भविष्य की योजनाएं इस फैसले के पीछे अहम कारण हो सकती हैं।
एनआरएआई के महासचिव पवन सिंह ने स्वीकार किया कि अंगद का जाना भारतीय शूटिंग के लिए नुकसान है। उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि उनका जाना हमारे देश और फेडरेशन दोनों के लिए बड़ा नुकसान है, लेकिन हमारे पास टैलेंट की कमी नहीं है। भारत में कई युवा निशानेबाज हैं जो इस खालीपन को भर सकते हैं।
यह बयान भारतीय शूटिंग सिस्टम में मौजूद बेंच स्ट्रेंथ और टैलेंट पूल पर भरोसा दिखाता है, हालांकि अनुभवी खिलाड़ियों का देश छोड़ना हमेशा चिंता का विषय रहता है।











