बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: महायुति को स्पष्ट बहुमत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी, ठाकरे युग का अंत

बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: महायुति को स्पष्ट बहुमत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी, ठाकरे युग का अंत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार और रविवार को पश्चिम बंगाल तथा असम के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दोनों राज्यों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

नई दिल्ली: मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह घोषित हो चुके हैं। इन नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बीएमसी चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर इतिहास रच दिया है, जबकि भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। यह परिणाम लगभग 25 वर्षों से बीएमसी पर चले आ रहे ठाकरे परिवार के प्रभुत्व के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टीवार परिणाम: भाजपा शीर्ष पर

बीएमसी चुनाव परिणामों के अनुसार,

  • भाजपा ने 89 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया।
  • शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – यूबीटी) को 65 वार्डों में जीत मिली।
  • शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 29 वार्डों पर कब्जा जमाया।
  • कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं।
  • एआईएमआईएम ने 8, जबकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को 6 वार्डों में सफलता मिली।
  • अन्य दलों में एनसीपी (3), समाजवादी पार्टी (2) और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली।

भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन महायुति ने कुल 118 वार्ड जीतकर बहुमत के आंकड़े 114 को पार कर लिया है। इसके साथ ही बीएमसी पर महायुति का नियंत्रण तय हो गया है। यह पहली बार है जब भाजपा ने बीएमसी में इतनी बड़ी सफलता दर्ज की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम मुंबई की शहरी राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत है।

ठाकरे परिवार के लिए बड़ा झटका

बीएमसी पर 1997 से 2022 तक अविभाजित शिवसेना का नियंत्रण रहा था। हालांकि 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला बीएमसी चुनाव था, जिसमें ठाकरे गुट सत्ता से बाहर हो गया। चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए थे और “ठाकरे ब्रांड” व मराठी अस्मिता को चुनावी मुद्दा बनाया था। इसके बावजूद एमएनएस को केवल 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा, और पार्टी एआईएमआईएम से भी पीछे रह गई।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकासोन्मुख नीतियों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि मुंबईवासियों ने महायुति पर भरोसा जताया है और अब शहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई की जनता ने 25 वर्षों से सत्ता में रहे लोगों के खिलाफ मतदान किया है और “विकास के ब्रांड” को चुना है। 

उन्होंने ठाकरे भाइयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ दल भावनात्मक मुद्दों पर चुनाव लड़े, जबकि महायुति ने विकास को प्राथमिकता दी। उधर, शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि उसने कड़ी टक्कर दी और कई अहम क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन बहुमत से चूक गई।

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