भारतीय महिला क्रिकेट टीम को जल्द ही नया स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच मिलेगा। टीम ने इंग्लैंड के निकोलस ली को इस पद के लिए चुना है। निकोलस ली महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) 2026 के समापन के बाद भारतीय महिला टीम के साथ अपना कार्यभार संभालेंगे।
स्पोर्ट्स न्यूज़: वनडे विश्व कप की चैंपियन भारतीय महिला क्रिकेट टीम को जल्द ही नया स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच मिलने वाला है। इंग्लैंड के निकोलस ली महिला प्रीमियर लीग (WPL) के समापन के बाद अपना कार्यभार संभालेंगे। पांच टीमों वाली डब्ल्यूपीएल का आयोजन 9 जनवरी से 5 फरवरी तक नवी मुंबई और वडोदरा में किया जाएगा।
एक सूत्र ने गुरुवार को बताया कि डब्ल्यूपीएल के बाद निकोलस ली आधिकारिक तौर पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच की जिम्मेदारी संभालेंगे।
पांच टीमों वाली डब्ल्यूपीएल 2026 का आयोजन 9 जनवरी से 5 फरवरी तक नवी मुंबई और वडोदरा में होगा। ली इस लीग के बाद भारतीय महिला टीम में शामिल होंगे। एक सूत्र ने गुरुवार को बताया कि डब्ल्यूपीएल 2026 खत्म होने के बाद ही ली टीम के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

निकोलस ली का क्रिकेट बैकग्राउंड, ऑस्ट्रेलिया दौरे से होगी शुरुआत
निकोलस ली के आने के बाद भारतीय महिला टीम 15 फरवरी से 9 मार्च तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएगी। इस दौरे में टीम कई प्रारूपों की सीरीज खेलेगी, जिसमें वनडे और टी20 सीरीज शामिल हैं। इस दौरे के दौरान ली की भूमिका खिलाड़ियों की फिटनेस, कंडीशनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को उच्च स्तर पर बनाए रखने में अहम होगी।
निकोलस ली एक दाएं हाथ के बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने 13 प्रथम श्रेणी मैचों में 490 रन बनाए हैं। खेल जगत में उनकी विशेषज्ञता केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई टीमों में स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के रूप में कार्य किया है। हाल ही में वह संयुक्त अरब अमीरात की आईएल टी20 लीग के चौथे सत्र में गल्फ जायंट्स के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच थे। इसके पहले, जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक उन्होंने अफगानिस्तान पुरुष टीम के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच के रूप में काम किया।
भारतीय महिला टीम के लिए महत्व
भारतीय महिला टीम को वनडे और टी20 प्रारूप में लगातार सफलता मिल रही है। वनडे विश्व कप की चैंपियन होने के नाते टीम की फिटनेस और स्ट्रेंथ पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है। निकोलस ली की विशेषज्ञता टीम के खिलाड़ियों की कंडीशनिंग, चोट से सुरक्षा और खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में अहम साबित होगी।
टीम के खिलाड़ियों की एथलेटिक क्षमता, सहनशीलता और मैच के दौरान शारीरिक मजबूती बढ़ाने के लिए ली नई ट्रेनिंग तकनीक और आधुनिक फिटनेस प्रोटोकॉल लाएंगे। इससे भारतीय महिला टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत और प्रतिस्पर्धात्मक बन सकेगी।











