ब्रिटेन उपचुनाव से पहले उर्दू संदेश पर सियासी टकराव, ग्रीन पार्टी की रणनीति पर घिरी पार्टी

ब्रिटेन उपचुनाव से पहले उर्दू संदेश पर सियासी टकराव, ग्रीन पार्टी की रणनीति पर घिरी पार्टी

ब्रिटेन के उपचुनाव में ग्रीन पार्टी के उर्दू प्रचार वीडियो से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दिखाया गया, जिस पर विपक्ष ने समुदाय आधारित ध्रुवीकरण का आरोप लगाया।

World News: United Kingdom के उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में होने वाले एक उपचुनाव से पहले चुनावी माहौल गरमा गया है। विवाद की वजह Green Party of England and Wales का एक उर्दू प्रचार वीडियो है। इस वीडियो में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ दिखाया गया है।

वीडियो जारी होते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह कदम चुनावी लाभ के लिए सामुदायिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश है। वहीं ग्रीन पार्टी के समर्थक इसे लक्षित समुदाय तक अपनी बात पहुंचाने की सामान्य रणनीति बता रहे हैं।

गॉर्टन और डेंटन सीट पर कड़ी टक्कर

मैनचेस्टर की गॉर्टन और डेंटन सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प है। यहां Labour Party, Conservative Party और Green Party of England and Wales के बीच सीधी टक्कर है। इसके अलावा दक्षिणपंथी पार्टी Reform UK भी आप्रवासन विरोधी संदेश के साथ मैदान में है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर एशियाई और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में उर्दू भाषा में प्रचार सामग्री जारी करना रणनीतिक कदम माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि वीडियो में विदेशी नेताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल किस मकसद से किया गया।

वीडियो में क्या दिखाया गया

उर्दू में जारी इस वीडियो में प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर को नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दिखाया गया है। वीडियो का संदेश यह संकेत देता है कि लेबर नेतृत्व की विदेश नीति कुछ समुदायों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति मतदाताओं के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और पश्चिम एशिया के मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं। उनका तर्क है कि स्थानीय चुनाव को अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ जोड़ना मतदाताओं को भ्रमित कर सकता है।

लेबर सांसद की कड़ी प्रतिक्रिया

स्टॉकपोर्ट से लेबर सांसद Navendu Mishra ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की राजनीति में नस्लवाद या सामुदायिक तनाव भड़काने की कोई जगह नहीं है। उन्होंने इसे निंदनीय तरीका बताते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए ऐसी रणनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

मिश्रा ने यह भी कहा कि यह वीडियो गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका संकेत इस ओर था कि क्या किसी विशेष समुदाय को लक्षित कर भावनात्मक मुद्दों को उभारा जा रहा है। लेबर पार्टी के अन्य नेताओं ने भी अप्रत्यक्ष रूप से चिंता जताई है।

ग्रीन पार्टी का पक्ष

ग्रीन पार्टी की ओर से अब तक औपचारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि अलग-अलग भाषाओं में प्रचार करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका तर्क है कि बहुभाषी समाज में मतदाताओं से उनकी भाषा में संवाद करना गलत नहीं है।

हालांकि आलोचकों का कहना है कि भाषा से अधिक आपत्ति वीडियो की प्रस्तुति और संदर्भ को लेकर है। उनका मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव प्रचार में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि सामाजिक सद्भाव प्रभावित न हो।

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