शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। FII की बिकवाली, कम कारोबार और IT व ऑटो शेयरों में दबाव से निवेशकों की सतर्कता बढ़ी।
Closing Bell Today: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का माहौल देखने को मिला। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। छुट्टियों के कारण कम कारोबार, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और किसी बड़े घरेलू या वैश्विक ट्रिगर की कमी ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा। आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खासतौर पर दबाव देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर असर पड़ा।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 367 अंक की गिरावट के साथ फिसल गया। वहीं एनएसई निफ्टी 26,050 के नीचे बंद हुआ। बाजार की शुरुआत भी कमजोर रही और दिनभर उतार-चढ़ाव बना रहा। क्रिसमस की छुट्टी के बाद खुले बाजार में निवेशकों ने ज्यादा जोखिम लेने से परहेज किया, जिसका सीधा असर इंडेक्स पर दिखा।
सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 190 अंक नीचे कारोबार कर रहा था और निफ्टी में भी लगभग 60 अंकों की गिरावट देखी गई थी। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव कुछ शेयरों में और गहरा होता गया, जिससे अंत में गिरावट बढ़कर बंद हुई।
किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट
आज के कारोबार में कई दिग्गज शेयर दबाव में रहे। बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, TCS, HCL Tech, टाटा स्टील और ईटरनल जैसे शेयरों में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर आईटी सेक्टर पर निवेशकों की नजरें टिकी रहीं, जहां कमजोर ग्लोबल संकेतों और कम डील एक्टिविटी की चिंता ने शेयरों को नीचे खींचा।
ऑटो सेक्टर में भी सुस्ती दिखी। लागत से जुड़ी चिंताओं और मांग को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसका असर इंडेक्स के मूवमेंट पर साफ नजर आया।
किन शेयरों ने दी थोड़ी राहत
हालांकि बाजार पूरी तरह निराशाजनक नहीं रहा। कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। BEL, टाइटन, NTPC, पावर ग्रिड और ICICI बैंक जैसे शेयरों ने बढ़त दिखाई और बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की। खासतौर पर पावर और डिफेंस से जुड़े शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही।
मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन
बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में भी हल्की तेजी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ निवेशक चुनिंदा सेक्टर और स्टॉक्स में मौके तलाशते नजर आए।
सेक्टर वाइज बाजार की चाल
सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में मजबूती रही। मेटल शेयरों में अंतरराष्ट्रीय संकेतों और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता से सहारा मिला। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में घरेलू मांग की उम्मीदों ने निवेशकों को आकर्षित किया।
इसके उलट निफ्टी आईटी और निफ्टी ऑटो सबसे कमजोर सेक्टर रहे। आईटी शेयरों पर ग्लोबल टेक खर्च को लेकर चिंता और ऑटो सेक्टर पर लागत और मार्जिन से जुड़े सवाल हावी रहे।
FII और DII का रुख
बाजार पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का साफ असर दिखा। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने हालिया कारोबारी सत्र में हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने बाजार में खरीदारी की और कुछ हद तक गिरावट को संभालने की कोशिश की।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला थमता नहीं है, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल हो सकता है।
पिछले कारोबारी सत्र का असर
इससे पहले वाले सत्र में भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में हल्की गिरावट देखी गई थी। लगातार दो सत्रों की कमजोरी ने निवेशकों को और सतर्क बना दिया है। बाजार फिलहाल ऊंचे स्तरों के आसपास कंसॉलिडेशन के दौर से गुजरता नजर आ रहा है।
विदेशी बाजारों से मिले संकेत
वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिले। अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की कमजोरी देखी गई, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई 225 रिकॉर्ड स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया, जहां सरकारी रक्षा बजट में बढ़ोतरी और इंडस्ट्रियल कंपनियों में तेजी का असर दिखा।
चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की गिरावट में रहा, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में बढ़त देखने को मिली। थाईलैंड और भारत जैसे कुछ बाजार दबाव में रहे।
सोना, चांदी और कच्चे तेल का हाल
कमजोर बाजार और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ता दिखा। सोना और चांदी दोनों ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड या उसके आसपास के स्तर पर पहुंच गए। सेंट्रल बैंक की खरीदारी और अमेरिकी फेड द्वारा अगले साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड और यूएस क्रूड दोनों मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। हालांकि तेल की कीमतें अभी भी सीमित दायरे में बनी हुई हैं।











