दिल्ली MCD उपचुनाव में मतगणना जारी, 12 वार्डों पर दांव, बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

दिल्ली MCD उपचुनाव में मतगणना जारी, 12 वार्डों पर दांव, बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

दिल्ली MCD के 12 वार्डों में उपचुनाव की मतगणना जारी है। BJP, AAP और कांग्रेस के लिए यह हाई-स्टेक मुकाबला है। शालीमार बाग बी और द्वारका बी वार्ड पर विशेष ध्यान है। नतीजे दिल्ली की राजनीतिक ताकत का संकेत देंगे।

Delhi MCD By Election Result: दिल्ली नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों में हुए उपचुनाव के नतीजों का इंतजार खत्म होने वाला है। इन सभी वार्डों में मतगणना जारी है और सुबह से ही माहौल राजनीतिक रूप से बेहद गर्म है। यह उपचुनाव राजधानी की तीन प्रमुख पार्टियों—BJP, AAP और कांग्रेस—के लिए किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं माना जा रहा है। यह नतीजे न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि दिल्ली में पार्टियों की साख और पकड़ का भी संकेत देंगे।
दिल्ली में यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है जो विधानसभा चुनावों के बाद हो रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की जनता किस पार्टी पर भरोसा जताती है और किसकी पकड़ कमजोर होती है।

12 वार्डों पर हुए मतदान का महत्व

MCD के 12 वार्डों में 30 नवंबर को मतदान हुआ था। इनमें से 9 वार्ड BJP के कब्जे में थे जबकि बाकी वार्ड AAP के पास थे। कांग्रेस इस बार अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।

मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हो रही है। दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए विशेष तैयारी की है और सभी केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।

इन 12 वार्डों में मतगणना के लिए कंझावला, पीतमपुरा, भरत नगर, सिविल लाइंस, राउज एवेन्यू, द्वारका, नजफगढ़, गोल मार्केट, पुष्प विहार और मंडावली में 10 विशेष केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया है।

कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना

दिल्ली पुलिस के करीब 1,800 जवानों को मतगणना के दौरान सुरक्षा में लगाया गया है। साथ ही अर्द्धसैनिक बलों की 10 कंपनियाँ भी तैनात हैं। लगभग 700 कर्मचारी मतगणना कार्य में सीधे शामिल हैं। उम्मीदवारों और उनके अधिकृत एजेंटों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारू रहे।

मतदान प्रतिशत 38.51 रहा, जो MCD 2022 के चुनाव के मुकाबले काफी कम है। 2022 में 250 वार्डों में हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत 50.47 था। इससे यह स्पष्ट होता है कि जनता की भागीदारी इस उपचुनाव में थोड़ी कमजोर रही। इसके बावजूद नतीजे राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम हैं।

शालीमार बाग बी और द्वारका बी वार्ड पर निगाहें

दो वार्ड इस चुनाव का केंद्र बने हुए हैं—शालीमार बाग बी और द्वारका बी।

शालीमार बाग बी वार्ड इसलिए खाली हुआ क्योंकि यहां की निगम पार्षद रहीं रेखा गुप्ता विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बनीं थीं। उनकी जीत के कारण यह सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव की नौबत आई।

दूसरी ओर, द्वारका बी वार्ड भी खास है क्योंकि यहां से भाजपा की सांसद कमलजीत सेहरावत पूर्व में निगम पार्षद रह चुकी हैं। ऐसे में यह वार्ड BJP के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

BJP की प्रतिष्ठा, AAP और कांग्रेस की वापसी की चुनौती

यह उपचुनाव BJP के लिए हाई-स्टेक मुकाबला है। विधानसभा चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी और अब पहली बार वह जनता के मूड का सामना कर रही है कि उसके प्रति भरोसा कायम है या नहीं।

दूसरी ओर, AAP और कांग्रेस दोनों ही दिल्ली में अपना खोया प्रभाव वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। AAP ने नगर निगम चुनावों में पहले मजबूत प्रदर्शन किया था लेकिन विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत ने उसके सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस भी बीते चुनावों में लगभग सिमट चुकी थी, इसलिए उसके लिए यह उपचुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है।

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