गीता जयंती 2025, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को, 1 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह वही दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान दिया था। इस दिन घर पर पूजा, गीता पाठ और मंत्र जाप करके आध्यात्मिक लाभ और मानसिक शांति प्राप्त की जाती है।
Gita Jayanti: इस वर्ष गीता जयंती सोमवार, 1 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व भारत में विशेष रूप से हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाता है और इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान दिया था। भक्त इस दिन घर पर पूजा, गीता पाठ और मंत्र जाप करते हैं, जिससे आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। पर्व का मुख्य उद्देश्य धर्म, कर्म और मोक्ष के मार्ग का अध्ययन करना है।
गीता जयंती का महत्व
हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी विशेष रूप से पावन मानी जाती है, और इस दिन गीता जयंती मनाई जाती है। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को महाभारत युद्ध के दौरान भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। गीता जयंती हिंदू धर्म का एकमात्र ऐसा पर्व है, जो किसी ग्रंथ की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुख से अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था, वह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी थी। इसलिए हर साल इसी तिथि को गीता जयंती के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्ञान और अध्यात्म की प्राप्ति का अवसर भी प्रदान करता है।
गीता जयंती 2025 तिथि और मुहूर्त
इस वर्ष गीता जयंती सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि की शुरुआत 30 नवंबर, 2025 को रात 9:30 बजे से हो रही है और यह तिथि 1 दिसंबर, 2025 को शाम 7:02 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, इस पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
गीता जयंती के दिन उपवास रखना भी एक आम प्रथा है। साधारणतया, भक्त इस दिन हल्का भोजन करते हैं या पूरी तरह उपवास रखते हैं। यह दिन ध्यान, भजन और गीता का पाठ करने के लिए अनुकूल समय माना जाता है।

घर पर गीता जयंती पूजा विधि
- स्नान और शुद्ध वस्त्र: पूजा की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करके करें और साफ वस्त्र पहनें।
- प्रतिमा या फोटो स्थापना: भगवान कृष्ण की प्रतिमा या फोटो को पूजा स्थल पर स्थापित करें और गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
- दीपक और तिलक: प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और भगवान पर तिलक करें।
- फूल और भोग अर्पित करें: फूल, तुलसी दल, मिष्ठान और नैवेद्य अर्पित करें। इस दौरान श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक को किसी साफ वस्त्र पर रखकर पूजा करें।
- गीता का पाठ: यदि पूरी गीता पढ़ना संभव न हो, तो विशेष रूप से अध्याय 12 (भक्ति योग) या अध्याय 15 पढ़ें। यह अध्याय भक्तियोग और मोक्ष के मार्ग को समझने में मदद करते हैं।
- मंत्र जाप और आरती: पूजा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
गीता जयंती में जाप किए जाने वाले प्रमुख मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ॐ श्रीकृष्णाय नमः
ॐ देविकानन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयातः
क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः
इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और भक्ति भाव से करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
गीता जयंती पर विशेष ध्यान देने योग्य बातें
- ध्यान और भजन: गीता जयंती केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन ध्यान और भजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण के गुणगान और गीता के उपदेशों का अध्ययन करते हैं।
- उपवास और संयम: गीता जयंती पर उपवास रखने से शरीर और मन दोनों को शुद्धि मिलती है। उपवास रखने वाले व्यक्ति मानसिक रूप से भी अधिक सजग और सकारात्मक रहते हैं।
- गीता का अध्ययन: इस दिन गीता का अध्ययन करने से जीवन में नैतिकता, धर्म और कर्म का मार्ग स्पष्ट होता है। यह भक्त को जीवन के कर्तव्यों और मोक्ष की प्राप्ति की ओर मार्गदर्शन करता है।
गीता जयंती का आध्यात्मिक महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान युद्ध के मैदान में दिया था, ताकि उसे धर्म और कर्तव्य का मार्ग स्पष्ट हो सके। गीता जयंती का पर्व हमें यही याद दिलाता है कि ज्ञान और धर्म का मार्ग केवल पूजा या भक्ति में ही नहीं, बल्कि कर्म और जीवन के निर्णयों में भी महत्वपूर्ण है।
गीता जयंती हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सही ज्ञान का पालन करना चाहिए। यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को मार्गदर्शित करने वाला एक प्रेरक अवसर है।











