हादसे ने छीन लिया तीन बच्चों के सिर से पिता का साया, गोद में 1 साल का बेटा लिए रोती रही पत्नी

हादसे ने छीन लिया तीन बच्चों के सिर से पिता का साया, गोद में 1 साल का बेटा लिए रोती रही पत्नी

लाखेरी के लबान क्षेत्र में सड़क हादसे में कालूलाल गुर्जर की मौत हो गई। चौथ माता की पदयात्रा पर निकले युवक के निधन से तीन छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।

Rajasthan: बूंदी जिले के लाखेरी क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। लबान-पापड़ी मार्ग पर हुए इस हादसे में सांगोद क्षेत्र के करीरिया गांव निवासी कालूलाल गुर्जर की मौके पर ही मौत हो गई। कालूलाल हर साल की तरह इस बार भी चौथ माता की पैदल यात्रा पर निकले थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनकी यह आस्था की यात्रा अधूरी रह गई और परिवार को जिंदगी भर का गम दे गई।

बताया गया कि कालूलाल शनिवार को अपने गांव से घटाल गांव निवासी दोस्त महावीर बैरवा के साथ पैदल यात्रा के लिए रवाना हुए थे। दोनों चौथ माता के दर्शन के लिए पैदल चल रहे थे। रविवार सुबह लबान के पास अचानक हुए हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। जैसे ही कालूलाल की मौत की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे की खबर मिलते ही कालूलाल के परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके बड़े भाई हरिओम गुर्जर ने बताया कि कालूलाल तीन भाइयों में मंझले थे और परिवार की जिम्मेदारी कंधों पर थी। वे मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।

कालूलाल के निधन से उनके तीन छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र केवल पांच साल है, जबकि सबसे छोटा बेटा अभी एक साल का है। बच्चों की हालत देखकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और घर में मातम पसरा हुआ है।

मेहनत-मजदूरी से चल रहा था परिवार

ग्रामीणों के अनुसार कालूलाल के परिवार के पास केवल पांच बीघा जमीन है, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। इसी कारण वे पाली जिले में आसापुरा माताजी गोशाला में मजदूरी का काम करते थे। वहीं रहकर वे अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटाते थे।

शनिवार को वे खास तौर पर गांव लौटे थे ताकि चौथ माता की पैदल यात्रा में शामिल हो सकें। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी। कालूलाल के सरल स्वभाव और मेहनती जीवन की गांव में हर कोई तारीफ करता है।

ग्रामीण रामस्वरूप नागर ने बताया कि कालूलाल बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के थे और हर साल पैदल यात्रा करते थे। उनके जाने से न केवल परिवार बल्कि पूरा गांव गहरे सदमे में है। लोग सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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