जीडीपी 2022-23: मूल्यांकन में बदलाव, एकल अपस्फीति हटाकर दोहरी अपस्फीति लागू

जीडीपी 2022-23: मूल्यांकन में बदलाव, एकल अपस्फीति हटाकर दोहरी अपस्फीति लागू

सरकार ने जीडीपी मापने का आधार वर्ष 2022-23 कर दिया है। नई श्रृंखला में असंगठित क्षेत्र, घरेलू सेवाएं और ई-वाहन शामिल होंगे। इससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और निवेश निर्णयों के लिए भरोसेमंद डेटा मिलेगा।

GDP: सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को मापने की पद्धति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब आधार वर्ष 2022-23 को अपनाया जाएगा। इस नई श्रृंखला में आंकड़ों को और सटीक बनाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST), ई-वाहन और घरेलू कामगारों जैसे रसोइया, ड्राइवर और घरेलू सहायकों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को शामिल किया जाएगा।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बताया है कि नई श्रृंखला पर आधारित तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े अक्टूबर-दिसंबर 2025 के लिए शुक्रवार को जारी किए जाएंगे। नई पद्धति से आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा और नीति निर्माताओं के लिए भरोसेमंद डेटा उपलब्ध होगा।

क्यों बदल रहा है आधार वर्ष

राष्ट्रीय लेखा का आधार वर्ष अब 2011-12 से 2022-23 कर दिया गया है। सरकार हर पांच साल में जीडीपी आंकड़ों की श्रृंखला को अद्यतन करती है। हालांकि कोविड महामारी और जीएसटी के लागू होने के कारण यह काम पहले पूरा नहीं हो पाया था।

नई श्रृंखला से यह सुनिश्चित होगा कि अर्थव्यवस्था में वर्षों में आए बदलाव को सही तरीके से मापा जा सके। साथ ही असंगठित और घरेलू क्षेत्रों की गतिविधियों को शामिल करने से आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

असंगठित क्षेत्र और घरेलू सेवाओं को मिलेगा महत्व

नई पद्धति में असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण और आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (PLFS) का उपयोग करके वास्तविक स्तर के अनुमान तैयार किए जाएंगे। यह सर्वेक्षण घरेलू क्षेत्र की गतिशीलता को नियमित और सटीक रूप से मापने में मदद करेंगे।

इसके अलावा, घरेलू कामगार जैसे रसोइया, ड्राइवर और सफाई करने वाले आदि द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को अब जीडीपी में शामिल किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि घरेलू क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है और इसे आंकड़ों में सही ढंग से परिलक्षित किया जा सकेगा।

ई-वाहन और निजी उपभोग को मिलेगा स्थान

नई पद्धति में ई-वाहन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग सड़क परिवहन सेवाओं से संबंधित निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) के अनुमान के लिए किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि ई-वाहन और नए परिवहन साधनों का अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है।

वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक वाहन और नई तकनीक के वाहन तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके आंकड़े जीडीपी में शामिल होने से अर्थव्यवस्था की आधुनिक और वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

नई पद्धति में मूल्यांकन का बदलाव

नई श्रृंखला में एकल अपस्फीति (कीमत में गिरावट) पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर विनिर्माण और कृषि जैसे क्षेत्रों में दोहरी अपस्फीति लागू की जाएगी। इससे उत्पादों और सेवाओं की कीमतों के वास्तविक प्रभाव को बेहतर तरीके से मापा जा सकेगा।

यह बदलाव नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आर्थिक निर्णय अधिक सटीक और भरोसेमंद आंकड़ों पर आधारित होंगे।

पिछली श्रृंखला कब तक जारी रहेगी

वर्तमान में चल रही श्रृंखला के आंकड़े दिसंबर 2026 तक जारी किए जाने की उम्मीद है। इस अवधि में नई और पुरानी श्रृंखला के आंकड़ों की तुलना की जाएगी ताकि बदलाव और सुधार के प्रभाव को समझा जा सके। इसके साथ ही नई श्रृंखला से भविष्य की योजना और निवेश निर्णयों के लिए अधिक विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होगा।

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