Karnataka CM Controversy: कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान, सिद्धारमैया का हाईकमान को संदेश

Karnataka CM Controversy: कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान, सिद्धारमैया का हाईकमान को संदेश

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद और सत्ता को लेकर चल रहा संघर्ष अब भी जारी है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक सिद्धारमैया ने दो टूक अंदाज में पार्टी हाईकमान की भूमिका को रेखांकित किया है। 

नई दिल्ली: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद और शासन परिवर्तन को लेकर कांग्रेस में चल रहा सत्ता संघर्ष अभी भी जारी है। मंगलवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बार फिर पार्टी हाई कमान के फैसले का राग गाया।

सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी हाई कमान को राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे भ्रम को खत्म करना होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे सीएम बदलने के मामले में हाई कमान के फैसले का पालन करेंगे और विधायक पार्टी नेतृत्व से मिलकर अपनी राय साझा कर सकते हैं।

सिद्धारमैया का स्पष्ट संदेश

सिद्धारमैया ने कहा कि विधायक पार्टी नेतृत्व से अपनी राय साझा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय हाईकमान का ही होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दिल्ली जाने वाले विधायक अपनी स्वतंत्रता के तहत ऐसा कर सकते हैं। इस बयान से साफ संदेश गया कि राज्य स्तर पर किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से वे प्रभावित नहीं होंगे और पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व की बात सर्वोपरि है।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज तब हो गईं जब राज्य की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इस बीच, सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की चर्चाएँ भी सामने आईं। कहा जा रहा है कि अगले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद डीके शिवकुमार को दिया जा सकता है।

विधायकों की दिल्ली यात्रा और हाईकमान से मुलाकात

सूत्रों के अनुसार, 23 नवंबर को छह कांग्रेस विधायक शिवकुमार का समर्थन करने के लिए दिल्ली गए। इसके अलावा कुछ और विधायक भी जल्द ही उच्च नेतृत्व से मिल सकते हैं। इससे पहले, पिछले हफ्ते लगभग दस विधायक AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर चुके थे। सिद्धारमैया के बाद शिवकुमार ने भी खरगे से मुलाकात की। इस दौरान वह बंगलूरू से खरगे को एयरपोर्ट तक भी गाड़ी में छोड़कर गए, जबकि इससे पहले उन्होंने उनसे निजी मुलाकात नहीं की थी। इससे साफ हुआ कि हाईकमान तक पहुंचने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय हैं।

सिद्धारमैया चाहते हैं कि कैबिनेट फेरबदल किया जाए, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले मुख्यमंत्री बदलने का निर्णय लिया जाए। यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका मतलब होगा कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे, जिससे शिवकुमार के सीएम बनने के मौके कमजोर हो जाएंगे।

यह राजनीतिक समीकरण कर्नाटक की कांग्रेस में सत्ता संघर्ष को और पेचीदा बना रहे हैं। पार्टी हाईकमान के निर्णय का असर केवल मुख्यमंत्री पद पर ही नहीं, बल्कि राज्य में आने वाले समय के राजनीतिक स्थायित्व और चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।

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