लालची कुत्ता और उसकी परछाई: लालच की हानि

लालची कुत्ता और उसकी परछाई: लालच की हानि

यह एक बहुत पुरानी और प्रसिद्ध कहानी है, जो हमें लालच के बुरे परिणाम के बारे में बताती है। हम अक्सर दूसरों के पास जो है, उसे देखकर ईर्ष्या करते हैं और जो हमारे पास पहले से मौजूद है, उसकी कद्र करना भूल जाते हैं। इसी लालच के चक्कर में हम अपना सब कुछ खो बैठते हैं।

मुख्य कहानी

एक बार की बात है, एक गाँव में शेरू नाम का एक आवारा कुत्ता रहता था। एक दिन उसे बहुत जोर की भूख लगी थी। खाने की तलाश में वह इधर-उधर भटक रहा था।

भटकते-भटकते उसकी किस्मत चमकी और उसे बाजार में एक कसाई की दुकान के पीछे एक बड़ी और मांसदार हड्डी का टुकड़ा मिल गया। शेरू की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने झट से वह हड्डी अपने मुँह में दबाई और किसी शांत जगह की तलाश में दौड़ पड़ा, जहाँ बैठकर वह आराम से उसे खा सके, ताकि कोई दूसरा कुत्ता उसे छीन न ले।

रास्ते में उसे एक छोटी नदी पार करनी थी, जिसके ऊपर एक संकरा लकड़ी का पुल बना हुआ था।

जब शेरू पुल के बीच में पहुँचा, तो उसने अचानक नीचे नदी के साफ और ठहरे हुए पानी में देखा। पानी में उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी। लेकिन मूर्ख शेरू यह समझ नहीं पाया कि वह उसी का प्रतिबिंब (Reflection) है।

उसे लगा कि पानी के अंदर एक 'दूसरा कुत्ता' खड़ा है और उसके मुँह में भी एक हड्डी है।

लालची शेरू की नजर उस 'दूसरी' हड्डी पर गड़ गई। उसे भ्रम हो गया कि पानी वाले कुत्ते की हड्डी उसकी अपनी हड्डी से ज्यादा बड़ी और रसीली है। उसके मन में भयानक लालच आ गया।

उसने सोचा, 'अगर मैं इस दूसरे कुत्ते को डराकर इसकी हड्डी भी छीन लूँ, तो मेरे पास दो-दो हड्डियां हो जाएंगी, और मेरा मजा दोगुना हो जाएगा।'

उसने आओ देखा न ताव, उस 'दूसरे कुत्ते' को डराने और उसकी हड्डी छीनने के लिए जोर से भौंकने का फैसला किया।

जैसे ही उसने भौंकने के लिए अपना मुँह खोला 'भौंव!' उसकी अपनी हड्डी मुँह से छूटकर सीधे नीचे गहरे पानी में जा गिरी और डूब गई।

हड्डी के पानी में गिरते ही पानी हिल गया और वह 'दूसरा कुत्ता' (परछाई) भी गायब हो गया। शेरू पुल पर खड़ा पछताता रह गया। लालच के कारण न उसे दूसरी हड्डी मिली और जो उसके पास थी, वह भी हाथ से चली गई। उसे उस दिन भूखा ही रहना पड़ा।

सीख 

यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच का फल हमेशा बुरा होता है। हमें दूसरों की चीजों को देखकर ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए और ज्यादा पाने की अंधी दौड़ में नहीं भागना चाहिए। जो हमारे पास है, हमें उसी में संतोष करना चाहिए और उसकी कद्र करनी चाहिए। जो इंसान अपने पास मौजूद चीजों से खुश नहीं रहता, वह अंत में शेरू की तरह लालच के कारण अपना सब कुछ खो देता है।

Leave a comment