ममता बनर्जी का हाईवोल्टेज ड्रामा! कोलकाता में ईडी कार्रवाई पर किया जोरदार पलटवार

ममता बनर्जी का हाईवोल्टेज ड्रामा! कोलकाता में ईडी कार्रवाई पर किया जोरदार पलटवार

पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईडी की छापेमारी के दौरान कोलकाता में मौके पर पहुंचीं और हरे फोल्डर व लैपटॉप लेकर बाहर आईं। ममता ने इसे राजनीतिक जासूसी बताया, जबकि बीजेपी ने अदालत में अवमानना का आरोप लगाया।

West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को कोलकाता में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की छापेमारी के दौरान अचानक मौके पर पहुंच गईं। ईडी आई-पैक (I-PAC) और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर कोयला घोटाले की जांच कर रही थी। इसी दौरान ममता बनर्जी ने एक हरे रंग की फाइल और कथित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लेकर वहां से बाहर निकल आईं। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया और देशभर में सवाल उठने लगे कि आखिर इस हरे रंग की फाइल में क्या था।

हरे रंग की फाइल का राज

मुख्यमंत्री के कथित दावे के अनुसार, यह फाइल टीएमसी की 2026 के विधानसभा चुनाव की रणनीति और उम्मीदवारों की संभावित सूची से जुड़ी हुई थी। ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी ईडी का उपयोग कर उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डालते हुए फाइल और सबूत छीन लिए, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

प्रतीक जैन के घर पर दबिश

सुबह करीब 11 बजे साल्ट लेक स्थित आई-पैक कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर ईडी की टीम ने दबिश दी। जैसे ही खबर फैली, ममता बनर्जी का काफिला मौके पर पहुंचा। उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़कर घर में दाखिल होकर कुछ ही समय में हरे फोल्डर और लैपटॉप लेकर बाहर आईं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि यह कार्रवाई टीएमसी के आईटी सेल को निशाना बनाने की कोशिश है और बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं जीत सकती।

राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया

राजनीतिक विशेषज्ञ इस घटनाक्रम से हैरान हैं। 2022 में जब पार्थ चटर्जी के घर पर ईडी ने छापेमारी की थी या 2024 में शाहजहां शेख के मामले में कार्रवाई हुई थी, तब ममता बनर्जी ने कभी ऐसे हस्तक्षेप नहीं किए। सवाल उठता है कि आई-पैक और प्रतीक जैन के मामले में ऐसा क्या हुआ कि मुख्यमंत्री को स्वयं मौके पर पहुंचना पड़ा।

कोयला घोटाले का लिंक

ईडी के अनुसार, यह रेड 5 साल पुराने 'अनूप मांझी उर्फ लाला' केस से जुड़ी हुई है। अनूप मांझी ने कोयला तस्करी से करोड़ों की कमाई की, जिसे हवाला के जरिए आई-पैक तक पहुंचाया गया। एजेंसी का दावा है कि 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में टीएमसी के प्रचार खर्च के लिए इस काले धन का उपयोग किया गया। ईडी के पास पुख्ता सबूत हैं कि अनूप मांझी के करीबी आई-पैक को भुगतान कर चुके हैं। यही कारण है कि ईडी इस फाइल और डिजिटल रिकॉर्ड को पकड़ने की कोशिश कर रही है।

अदालत में मामला

इस विवाद ने अब कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। ईडी ने अदालत में दावा किया कि ममता बनर्जी ने सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप किया और सबूत अपने कब्जे में ले लिए। इसके खिलाफ सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित है। वहीं, आई-पैक ने अपनी निजता का हवाला देते हुए रेड पर रोक लगाने की मांग की। टीएमसी ने भी याचिका दायर कर गोपनीय दस्तावेज़ वापस मांगे।

ममता बनर्जी ने इस पूरी कार्रवाई को 'राजनीतिक जासूसी' बताया और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं लड़ सकती, इसलिए डेटा और वोटर की रणनीति लूट रही है। इसके साथ ही उन्होंने इसे 'बंगाल बनाम दिल्ली' की लड़ाई में बदल दिया, यह संदेश देने की कोशिश की कि बीजेपी बंगाल की संस्कृति और टीएमसी की चुनावी रणनीति नष्ट करना चाहती है।

बीजेपी का आरोप

बीजेपी का दावा है कि ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डालकर 'अदालत की अवमानना' की। पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी और राहुल सिन्हा का कहना है कि ममता ने फाइल चोरी की है क्योंकि यह आधिकारिक जब्ती का हिस्सा थी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि PMLA की धाराओं के तहत जांच में बाधा डालना और सबूत हटाना गैर-जमानती अपराध माना जा सकता है।

विपक्षी गठबंधन में दरार

इस एक फाइल की घटना ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के भीतर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ममता के समर्थन में दिखे, लेकिन बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट ने उनका समर्थन नहीं किया। बंगाल कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए राजनीतिक नाटक कर रही हैं।

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