राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने इस्लाम पर कहा है कि पहले दिन इस्लाम जब भारत में आया, उस दिन से इस्लाम यहां है और रहेगा। उनके इस बयान का महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने स्वागत किया।
मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा इस्लाम पर दिए गए हालिया बयान ने देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। मोहन भागवत ने कहा कि “पहले दिन जब इस्लाम भारत में आया, तब से यह देश में है और रहेगा।” इस बयान का महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने स्वागत किया और इसे देश की एकता और सामाजिक सद्भाव के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया।
प्यारे खान की प्रतिक्रिया
प्यारे खान ने कहा,
'बहुत ही उम्दा और बहुत ही अच्छा बयान है। समस्त मुस्लिम समाज में खुशी की लहर है। जब हम पैगंबर मोहम्मद साहब का 1500वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं, उस समय ऐसा बयान आना बहुत बड़ी बात है। उन्होंने आगे कहा कि यह बयान उन नेताओं और संगठनों के लिए एक संदेश है जो देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं। प्यारे खान ने बताया कि मोहन भागवत का बयान सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक दिया गया है।'
उन्होंने कहा, आदर्श इस्लाम का मतलब है कि जिस देश में रहते हैं, उस देश के लिए काम करना है। जो देश के लिए काम करेगा वही आदर्श है। हमारे देश में आदर्शवादी मुसलमान काफी हैं।
मोहन भागवत का बयान
दिल्ली में RSS के शताब्दी समारोह के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी भी व्यक्ति या संगठन पर धार्मिक आधार पर हमला करने में विश्वास नहीं रखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इसमें किसी भी तरह की जोर-जबरदस्ती या प्रलोभन नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा,
'पहले दिन जब इस्लाम भारत में आया, तब से यह देश में है और रहेगा। यह विश्वास होना चाहिए कि दोनों समुदायों में समानता और सह-अस्तित्व है। हिंदू सोच इस प्रकार नहीं है कि किसी को समाप्त किया जाए। जब यह विश्वास बनेगा कि हम सब एक हैं, तभी संघर्ष खत्म होगा।'
इस बयान से यह संदेश भी मिलता है कि भारत की विविधता में सभी धर्मों को समान स्थान दिया जाना चाहिए और सह-अस्तित्व की भावना बनाए रखना समाज के लिए आवश्यक है।