मुजफ्फरपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने सिविल सर्जन समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। डीएम का कहना था कि बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर सुधार नहीं दिख रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
बैठक के दौरान जब कुछ मामलों में अधिकारियों ने “जानकारी मंगाने” की बात कही, तो डीएम इस पर भड़क गए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब सिर्फ जानकारी इकट्ठा करने का दौर खत्म हो चुका है। जहां भी लापरवाही दिखे, वहां सीधे कार्रवाई करें। डीएम ने साफ कहा कि जनता की सेहत से जुड़ा मामला है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने विशेष रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति पर नाराजगी जताई। मड़वन पीएचसी में एंबुलेंस से जुड़े मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही का मतलब है कि ज़रूरतमंद मरीजों की जान खतरे में डालना।
इसके अलावा औराई प्रखंड में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित बीपीएम और बीसीएम के वेतन पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया गया। डीएम ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी तय होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि सभी सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और उपकेंद्रों का नियमित निरीक्षण कराया जाए। दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों और कर्मियों की उपस्थिति, साफ-सफाई और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की रोज़ाना मॉनिटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति सामने आए।
बैठक में डीएम ने यह भी कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा, तो यह प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि आगे किसी भी तरह की शिकायत सामने आई तो सीधे जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
डीएम के इस सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जिले के कई अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में औचक निरीक्षण हो सकते हैं। प्रशासन का यह कदम आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर में डीएम का यह संदेश बिल्कुल साफ है—
अब लापरवाही नहीं, सिर्फ काम और जवाबदेही चलेगी।
मुजफ्फरपुर में ई-रिक्शा चालकों में जुर्माने का डर, एक महीने में 450 ने लाइसेंस के लिए किया आवेदन
मुजफ्फरपुर जिले में ई-रिक्शा चालकों के बीच इन दिनों जुर्माने का डर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। जिला प्रशासन और यातायात पुलिस की सख्ती के बाद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आगे आ रहे हैं। हालात यह हैं कि पिछले एक महीने में करीब 450 ई-रिक्शा चालकों ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, जो पहले के मुकाबले कई गुना अधिक है।
दरअसल, शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन ने ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन को लेकर सख्त अभियान शुरू किया है। बिना लाइसेंस, बिना परमिट और अधूरे कागजात के साथ चल रहे ई-रिक्शा चालकों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। चेकिंग के दौरान भारी जुर्माना वसूले जाने से चालकों में हड़कंप मच गया है।
यातायात पुलिस द्वारा जगह-जगह वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जिन चालकों के पास कागजात नहीं पाए जा रहे हैं, उनसे जुर्माना वसूला जा रहा है और कई मामलों में वाहन जब्त करने की चेतावनी भी दी जा रही है।
इसी सख्ती का असर यह हुआ कि अब तक बिना लाइसेंस ई-रिक्शा चला रहे चालक परिवहन कार्यालय का रुख कर रहे हैं। जिला परिवहन कार्यालय में लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, एक महीने के भीतर ही 450 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि पहले यह संख्या काफी कम रहती थी।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि रोज-रोज की चेकिंग और जुर्माने से बचने के लिए अब लाइसेंस बनवाना मजबूरी हो गई है। कई चालकों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से बिना लाइसेंस वाहन चला रहे थे, लेकिन अब प्रशासन की सख्ती के बाद जोखिम नहीं लेना चाहते।
परिवहन विभाग का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और कागजात के कोई भी ई-रिक्शा सड़कों पर नहीं चलने दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर में प्रशासन की सख्ती का असर अब दिखने लगा है। ई-रिक्शा चालकों में जुर्माने का डर जरूर है, लेकिन इसके साथ-साथ यह कदम यातायात व्यवस्था को सुधारने और नियमों के पालन की दिशा में अहम माना जा रहा है।











