मुजफ्फरपुर शहर में जलापूर्ति व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद लोगों को नियमित और शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। आए दिन पानी की कटौती, कम दबाव से आपूर्ति और दूषित पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब नगर निगम से जलापूर्ति व्यवस्था संभलने पर सवाल उठने लगे हैं और स्वतंत्र जल बोर्ड के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है।
शहर के कई वार्डों में सुबह और शाम तय समय पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है। कहीं मोटर खराब है तो कहीं पाइपलाइन लीकेज की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में हफ्तों से शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं हो रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब पानी के लिए रोजमर्रा की जद्दोजहद करनी पड़ती है।
नगर निगम के अधीन जलापूर्ति व्यवस्था होने के बावजूद रखरखाव और निगरानी में भारी लापरवाही देखी जा रही है। पुराने पाइपलाइन नेटवर्क, जर्जर पंप हाउस और तकनीकी स्टाफ की कमी से समस्या और गहराती जा रही है। कई जगहों पर पीने के पानी में गंदगी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
इन तमाम समस्याओं को देखते हुए अब शहर के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने जल बोर्ड के गठन की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जिस तरह बिजली बोर्ड या अन्य स्वायत्त निकाय काम करते हैं, उसी तरह एक अलग जल बोर्ड बनाया जाए, जो केवल जलापूर्ति व्यवस्था की देखरेख करे। इससे जवाबदेही तय होगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।
मांग करने वालों का कहना है कि नगर निगम पर पहले से ही सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट और अन्य कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में जलापूर्ति जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निगम पूरी तरह फोकस नहीं कर पा रहा है। अगर अलग जल बोर्ड का गठन होता है, तो तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति, नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध मरम्मत संभव हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जल संकट अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर समस्या बन चुका है। कई मोहल्लों में लोग टैंकर के सहारे पानी खरीदने को मजबूर हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इसके बावजूद निगम की ओर से स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और तकनीकी चुनौतियों के कारण दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, जल बोर्ड के गठन की मांग पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर में जलापूर्ति व्यवस्था एक बड़े सवाल के रूप में खड़ी है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहराने की आशंका है। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन जल बोर्ड के गठन की मांग को कितनी गंभीरता से लेता है और आम लोगों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।










