Google जल्द ही Google Play Store में एक नया बैटरी वार्निंग लेबल फीचर शुरू करने जा रहा है। इससे यूजर्स को ऐप डाउनलोड करने से पहले पता चल सकेगा कि कौन-सी ऐप ज्यादा बैटरी खर्च करती है। यह कदम यूजर्स को बेहतर जानकारी देने और डेवलपर्स को ऊर्जा-कुशल ऐप बनाने के लिए प्रेरित करेगा।
Play Store Battery Warning Feature: Google ने Google Play Store के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया है, जिसके तहत यूजर्स को ऐप डाउनलोड करने से पहले बैटरी खपत से जुड़ी चेतावनी दिखाई देगी। यह फीचर उन ऐप्स पर लागू होगा जो एंड्रॉयड सिस्टम के “Excessive Partial Wake Lock” थ्रेसहोल्ड को पार करती हैं और स्क्रीन बंद होने के बाद भी फोन के CPU को सक्रिय रखती हैं। इस अपडेट का उद्देश्य यूजर्स को पहले से जानकारी देना और डेवलपर्स को अपनी ऐप्स को ज्यादा बैटरी-फ्रेंडली बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
डाउनलोड से पहले ही दिखेगी बैटरी वार्निंग
अब जब भी यूजर Play Store पर कोई ऐप डाउनलोड करने जाएगा, तो ऐप के नाम और डेवलपर की जानकारी के साथ एक विशेष वार्निंग लेबल भी दिखाई दे सकता है। इस लेबल में साफ लिखा होगा कि ऐप बैकग्राउंड में ज्यादा एक्टिविटी के कारण अधिक बैटरी का उपयोग करती है।
यह फीचर यूजर्स को पहले से सतर्क करने के लिए शुरू किया गया है। इससे लोगों को ऐप इंस्टॉल करने से पहले ही अंदाजा हो जाएगा कि वह उनके स्मार्टफोन की बैटरी पर कितना असर डाल सकती है।

किन ऐप्स पर लगेगा यह लेबल
Google के अनुसार यह वार्निंग उन ऐप्स पर दिखाई जाएगी जो एंड्रॉयड सिस्टम के “Excessive Partial Wake Lock” थ्रेसहोल्ड को पार कर जाती हैं। यह सिस्टम तब सक्रिय होता है जब कोई ऐप स्क्रीन बंद होने के बाद भी फोन के CPU को चालू रखती है।
हालांकि कई ऐप्स के लिए यह मैकेनिज्म जरूरी होता है, लेकिन कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा बैकग्राउंड एक्टिविटी करती हैं। ऐसे मामलों में बैटरी तेजी से खत्म होती है। इसी वजह से Google ने इस थ्रेसहोल्ड सिस्टम को लागू किया है।
डेवलपर्स और यूजर्स दोनों को होगा फायदा
इस नए सिस्टम का पहला फायदा ऐप डेवलपर्स को प्रभावित करेगा। अगर किसी ऐप में ज्यादा बैटरी खपत की समस्या पाई जाती है तो उसे Play Store की रिकमंडेशन लिस्ट से हटाया जा सकता है। इससे डेवलपर्स को अपनी ऐप्स को ज्यादा ऊर्जा-कुशल बनाने पर काम करना पड़ेगा।
दूसरी तरफ यूजर्स को भी बड़ा फायदा मिलेगा। अब वे ऐप डाउनलोड करने से पहले ही तय कर सकेंगे कि उन्हें वह ऐप इंस्टॉल करनी चाहिए या नहीं। इससे बैटरी लाइफ बेहतर रखने में मदद मिलेगी और लोग ज्यादा भरोसे के साथ ऐप चुन सकेंगे।












