चौमूं में पथराव की घटना के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। 24 आरोपियों को नोटिस दिए गए थे, जिनमें से 19 गिरफ्तार हो चुके हैं। ड्रोन जांच में हिंसा की साजिश उजागर हुई, अब सख्ती जारी है।
Jaipur: जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में शुक्रवार सुबह प्रशासन और नगर परिषद की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पहले से जिन मकानों और दुकानों पर अवैध निर्माण को लेकर नोटिस लगाए गए थे, उन पर तय समय पूरा होते ही तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
प्रशासन की टीम जेसीबी मशीनों के साथ इलाके में पहुंची और अवैध ढांचों को गिराने का काम शुरू किया। इस दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।
अधिकारियों ने साफ कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का मकसद साफ है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति हिंसा या अवैध निर्माण की हिम्मत न कर सके।
24 पत्थरबाजों को नोटिस
चौमूं में हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 आरोपियों की पहचान की। इन सभी के घरों और उनसे जुड़े अवैध निर्माणों पर नगर परिषद की ओर से नोटिस चस्पा किए गए थे। आरोपियों को 1 जनवरी तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया गया था।
पुलिस अब तक इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच में सामने आया कि कई आरोपियों ने सरकारी जमीन या सार्वजनिक स्थान पर अवैध रूप से निर्माण कर रखा था। इनमें कुछ अवैध बूचड़खाने, उनके बाहर बनाए गए रैंप, सीढ़ियां और अन्य अतिक्रमण शामिल हैं।
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार, पहले चेतावनी देना जरूरी था, ताकि लोगों को अपनी गलती सुधारने का मौका मिल सके। लेकिन समय सीमा के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने पर मजबूरी में बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी।
पत्थर हटाने के दौरान भड़का था विवाद
पूरा मामला चौमूं के पठान मोहल्ले से जुड़ा है। यहां स्थित कलंदरी मस्जिद के बाहर लंबे समय से बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे। इन पत्थरों के कारण सड़क पर अक्सर जाम लग जाता था और लोगों को परेशानी होती थी।

प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए इन पत्थरों को हटाने का फैसला लिया। इस संबंध में मस्जिद कमेटी के साथ बैठक भी हुई, जिसमें पत्थर हटाने पर सहमति बनी थी। लेकिन जब नगर परिषद और प्रशासन की टीम पत्थर हटाने पहुंची, तभी अचानक कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते हालात बिगड़ गए।
भीड़ ने पथराव कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और हालात पर काबू पाया। इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया।
ड्रोन जांच में सामने आई पूर्व नियोजित साजिश
पथराव की घटना के बाद प्रशासन ने इलाके की गहन निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में कई घरों की छतों पर पहले से ईंटें, पत्थर और बोतलें जमा मिलीं।
इन तस्वीरों से यह साफ हुआ कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पत्थरबाजी की पूरी योजना बनाई गई थी और इसी कारण हालात इतने बिगड़े।
ड्रोन जांच के बाद कई नए तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामले दर्ज किए। प्रशासन ने इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए आगे भी कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है।
प्रशासन का साफ संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ है। अवैध निर्माण और हिंसा को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि चौमूं में शांति और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में भी शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे कानून का पालन करें और अफवाहों से दूर रहें।











