Shaksgam Valley में चीन के कथित निर्माण और BJP नेताओं की CPC प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
New Delhi: जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) को लेकर एक बार फिर भारत की राजनीति गरमा गई है। इस क्षेत्र में चीन द्वारा कथित निर्माण गतिविधियों की खबरों के सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विवाद की वजह तब और गहरी हो गई जब नई दिल्ली में
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई मुलाकात की जानकारी सामने आई। कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ चीन भारतीय क्षेत्र में निर्माण कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दल उससे राजनीतिक संवाद कर रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।
कांग्रेस का BJP पर सीधा हमला
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर BJP पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब देश की सीमाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं, तब ऐसे समय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाकात करना गलत संदेश देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की चुप्पी से चीन का हौसला बढ़ रहा है और वह भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि राजधानी में राजनीतिक बातचीत चल रही है, जबकि जमीनी स्तर पर चीन लगातार अपने दावे मजबूत कर रहा है।
Shaksgam Valley को लेकर गंभीर आरोप
कांग्रेस का दावा है कि चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपना क्षेत्र बताना शुरू कर दिया है। सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस इलाके में CPEC के नाम पर निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि लद्दाख में तनाव के बाद अब चीन शक्सगाम घाटी तक कैसे पहुंच गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सिर्फ निर्माण नहीं बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने की रणनीति है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर सख्त रुख नहीं अपनाया गया, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सीमा तनाव के बीच राजनीतिक संवाद पर सवाल

कांग्रेस ने BJP की उस बैठक के समय को लेकर सवाल उठाए हैं, जब सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत अभी भी देश की यादों में ताजा है। इसके बावजूद अगर चीन की सत्ताधारी पार्टी के साथ बातचीत होती है, तो यह देश की भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं और गहरी हो गई थीं।
अरुणाचल से Shaksgam तक बढ़ती चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा रहा है, लद्दाख में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है और अब शक्सगाम घाटी में निर्माण गतिविधियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में BJP नेताओं की CPC के साथ मुलाकात कई सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है, जिस पर सरकार को देश के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
मीडिया की चुप्पी पर भी निशाना
सुप्रिया श्रीनेत ने मीडिया के एक वर्ग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस बैठक को लेकर BJP से कोई कठिन सवाल क्यों नहीं पूछा जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर यही मुलाकात किसी अन्य पार्टी ने की होती, तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया जाता। कांग्रेस नेता ने पूछा कि BJP और चीन के बीच आखिर किस तरह का संबंध है और क्या इसके पीछे कोई गुप्त समझ है।
BJP का आधिकारिक जवाब
इस पूरे विवाद पर BJP ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक सामान्य अंतर-पार्टी संवाद था। पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने जानकारी दी कि CPC का प्रतिनिधिमंडल पार्टी मुख्यालय आया था। उन्होंने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट के उप मंत्री HE Sun Haiyan कर रहे थे। चौथाईवाले के अनुसार, बैठक का उद्देश्य दोनों दलों के बीच पार्टी-स्तरीय संवाद को आगे बढ़ाना था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में चीन के राजदूत HE Xu Feihong भी इस प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थे।
पुराना MOU विवाद फिर चर्चा में
इस घटनाक्रम के बाद भारत-चीन संबंधों से जुड़े पुराने राजनीतिक विवाद भी फिर से चर्चा में आ गए हैं। BJP ने पहले कांग्रेस पर 2008 में CPC के साथ MOU साइन करने का आरोप लगाया था। उस समय BJP नेताओं ने कहा था कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय हितों से समझौता किया। अब कांग्रेस उसी मुद्दे को पलटते हुए BJP पर सवाल उठा रही है कि जब चीन सीमा पर दबाव बना रहा है, तब इस तरह की राजनीतिक नजदीकियां क्यों दिखाई दे रही हैं।











