दिसंबर 2025 में भारत का निर्यात 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब डॉलर हुआ, लेकिन आयात 8.7 प्रतिशत बढ़ा। इसके कारण व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले महीने 24.53 अरब डॉलर था।
Trade Data: देश के व्यापार आंकड़े दिसंबर 2025 में मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। आधिकारिक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का निर्यात 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब डॉलर हो गया है। यह संकेत है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।
हालांकि, आयात में तेज वृद्धि के कारण व्यापार घाटा बढ़ गया है। दिसंबर में आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके चलते व्यापार घाटा मामूली रूप से बढ़कर 25.04 अरब डॉलर दर्ज किया गया। तुलना के लिए, नवंबर 2025 में व्यापार घाटा 24.53 अरब डॉलर था, जबकि दिसंबर 2024 में यह 22 अरब डॉलर था।
चालू वित्त वर्ष में निर्यात और आयात का रुझान
वित्त वर्ष 2025–26 की अप्रैल से दिसंबर तक की अवधि में कुल वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर हो गया। इसी दौरान आयात 5.9 प्रतिशत बढ़कर 578.61 अरब डॉलर तक पहुंचा।
इस तरह, चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़ा दिखाता है कि आयात में वृद्धि निर्यात की तुलना में तेज रही है, जिससे भारत का समग्र व्यापार घाटा बढ़ा है।
निर्यात में सकारात्मक रुझान
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार आंकड़ों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक रुझान दिखा रहा है। उन्होंने कहा, “मौजूदा रुझानों को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात, जिसमें वस्तु और सेवाएं शामिल हैं, 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है।”
विशेष रूप से दिसंबर में निर्यात में तेजी की अगुवाई इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और दवाओं जैसे क्षेत्रों ने की।
प्रमुख निर्यात बाजारों में स्थिर वृद्धि
अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत के प्रमुख निर्यात बाजार बने हुए हैं। इन देशों में निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए उम्मीद की किरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूरोपीय बाजार में मांग में बढ़ोतरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे सकती है। वहीं, फार्मा और समुद्री उत्पादों में गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी ने निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाए रखा है।
आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण
दूसरी ओर, आयात में तेज वृद्धि के कई कारण हैं। कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने ऊर्जा आयात को महंगा किया। इसके साथ ही मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात में भी वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात में तेज वृद्धि जारी रहती है, तो व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि सरकार निर्यात बढ़ाने और आयात संतुलित करने के लिए नीतिगत उपायों पर काम कर रही है।
भारत की निर्यात रणनीति
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं लागू की हैं। इनमें निर्यात प्रोत्साहन, टैक्स रिबेट और डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स का विस्तार शामिल है। इसके साथ ही, छोटे और मध्यम व्यवसायों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए एक्सपोर्ट–इंडेक्स और ट्रेड फेयर जैसी पहलें भी की जा रही हैं।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की निर्यात रणनीति लंबी अवधि में स्थिर और विविध बाजारों पर केंद्रित है। इसका मकसद न केवल व्यापार घाटा कम करना है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना भी है।











