उत्तराखंड सरकार ने राज्य में ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism in Uttarakhand) को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के हर जिले में दो-दो पर्यटन गांव (Tourism Villages) विकसित किए जाएंगे।
देहरादून: प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अब हर जिले में दो ग्रामीण पर्यटन गांवों का चयन किया जाएगा। इन गांवों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनने वाली टास्क फोर्स समिति करेगी। चयनित गांवों में पर्यटन विभाग के सहयोग से आवास और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सचिव पर्यटन धीराज गर्बयाल ने गुरुवार को उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड कार्यालय में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हर जिले में जिला टास्क फोर्स समिति का गठन किया जाना चाहिए, ताकि योजना प्रभावी रूप से लागू हो सके।
ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा संगठित स्वरूप
इस संबंध में सचिव पर्यटन धीराज गर्बयाल ने उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) कार्यालय में एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि पलायन रोकने और रोजगार सृजन का भी प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसी उद्देश्य से हर जिले में जिला टास्क फोर्स समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस टास्क फोर्स में ग्रामीण विकास, आयुष, कृषि, उद्यान, सगंध पौधा केंद्र, पंचायत राज, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन जैसे प्रमुख विभागों को शामिल किया जाएगा। ये समितियां अपने-अपने जिलों में पर्यटन की दृष्टि से संभावनाशील दो गांवों की पहचान कर प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजेंगी। इसके बाद चयनित गांवों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।

वेलनेस, साहसिक और सामुदायिक पर्यटन पर फोकस
सचिव पर्यटन ने बैठक के दौरान कुछ प्रमुख क्षेत्रों को विशेष पर्यटन श्रेणियों से जोड़ने के निर्देश भी दिए। इनमें—
- अल्मोड़ा का कसार देवी और देहरादून का लाखामंडल – वेलनेस टूरिज्म
- पिथौरागढ़ का मदकोट और नैनीताल का प्योड़ा – स्वास्थ्य एवं प्रकृति आधारित पर्यटन
- बागेश्वर का लीति गांव – सामुदायिक और साहसिक पर्यटन
- चमोली का घेस, उत्तरकाशी का जखोल, टिहरी का सौड़ और रुद्रप्रयाग का सारी गांव – साहसिक पर्यटन
इन गांवों को स्थानीय संस्कृति, खानपान, होमस्टे, ट्रैकिंग, योग, आयुष और प्रकृति अनुभवों से जोड़कर विकसित किया जाएगा।
मॉडल टूरिज्म विलेज की अवधारणा
सरकार का लक्ष्य है कि चयनित गांवों को सभी विभागों के समन्वय से मॉडल पर्यटन गांव के रूप में विकसित किया जाए। इसके तहत सड़क, पेयजल, स्वच्छता, डिजिटल कनेक्टिविटी, साइन बोर्ड, होमस्टे सुविधाएं, प्रशिक्षण और स्थानीय उत्पादों के विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे पर्यटकों को प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव मिलेगा और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।
बैठक में नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सचिव पर्यटन ने इस पवित्र और ऐतिहासिक यात्रा के सफल, सुचारू और समुदाय आधारित संचालन पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर स्थित सभी विश्राम स्थलों को सुव्यवस्थित किया जाए और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर सड़क, पेयजल, शौचालय, संचार और आपातकालीन सेवाओं जैसी आधारभूत सुविधाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।











