भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने नई चयन नीति को लागू कर दिया है, जिसके तहत अब सभी पहलवानों के लिए राष्ट्रीय शिविर में भाग लेना अनिवार्य होगा। हालांकि, जो पहलवान व्यक्तिगत रूप से अभ्यास कर रहे हैं, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने 2025 के लिए एक अहम और सख्त चयन नीति लागू की है, जिसका सीधा असर देश के सभी पहलवानों पर पड़ेगा। इस नई नीति के तहत अब राष्ट्रीय स्तर पर चयन के इच्छुक हर पहलवान के लिए राष्ट्रीय कोचिंग शिविर में भाग लेना अनिवार्य कर दिया गया है। महासंघ का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, अनुशासन और समान अवसर सुनिश्चित करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रदर्शन और मजबूत हो सके।
यह नई चयन नीति हाल ही में अहमदाबाद में आयोजित WFI की आम परिषद (जनरल काउंसिल) की बैठक में मंजूर की गई। इसके बाद इसे भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को फीडबैक और समीक्षा के लिए भेज दिया गया है। WFI का मानना है कि केंद्रीकृत प्रशिक्षण प्रणाली से पहलवानों की फिटनेस, तकनीक और प्रतिस्पर्धात्मक स्तर में सुधार होगा।
राष्ट्रीय शिविर में भागीदारी क्यों हुई अनिवार्य?
नई नीति के अनुसार, एलीट और सीनियर सहित सभी वर्गों के पहलवानों के लिए राष्ट्रीय कोचिंग शिविर में हिस्सा लेना जरूरी होगा। शिविर में चयन के लिए पहलवानों को राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतना अनिवार्य किया गया है। एक बार चयन होने के बाद पहलवानों को पूरे समय राष्ट्रीय शिविर में ही अभ्यास करना होगा। किसी अन्य स्थान पर व्यक्तिगत प्रशिक्षण की अनुमति सामान्य रूप से नहीं दी जाएगी।
महासंघ का कहना है कि इससे टीम की तैयारी में एकरूपता आएगी और कोचिंग स्टाफ को सभी पहलवानों की प्रगति पर नजदीकी नजर रखने में मदद मिलेगी।

किन पहलवानों को मिलेगी छूट?
हालांकि नीति सख्त है, लेकिन WFI ने कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा है। जो पहलवान व्यक्तिगत अभ्यास कर रहे हैं और जिनके पास इसके लिए ठोस कारण हैं, उन्हें सीमित छूट दी जा सकती है। इसके अलावा, ओलंपिक खेलों के लिए कोटा हासिल करने वाले पहलवानों को भी एक अहम राहत दी गई है। ऐसे पहलवानों को अंतिम चयन ट्रायल के केवल एक दौर में हिस्सा लेना होगा, न कि पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
इस नीति का असर देश की स्टार पहलवान विनेश फोगाट पर भी पड़ेगा, जिन्होंने हाल ही में संन्यास से वापसी का संकेत दिया है। नई नीति के मुताबिक, उन्हें फिर से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए घरेलू प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करना होगा और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतना अनिवार्य होगा। अगर कोई पहलवान राष्ट्रीय शिविर में शामिल नहीं होता है, तो वह चयन ट्रायल में भी हिस्सा नहीं ले सकेगा।
नई नीति में रिजर्व पहलवानों का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। अगर चयनित पहलवान चोटिल हो जाता है या किसी कारण से प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाता, तो रिजर्व पहलवान को मौका दिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि चयन ट्रायल में पिछले प्रदर्शन या पुरानी उपलब्धियों को आधार नहीं बनाया जाएगा। चयन पूरी तरह ट्रायल में दिखाए गए मौजूदा प्रदर्शन पर आधारित होगा।










