नई दिल्ली जल्द ही सांस्कृतिक दुनिया में एक नया इतिहास रचने जा रही है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ (Yuge Yugeen Bharat Museum) राजधानी में बनने जा रहा है।
नई दिल्ली: कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जो आकार में पेरिस के मशहूर लूव्र म्यूजियम से भी बड़ी हो और जिसमें भारत के 5,000 सालों का गौरवशाली इतिहास झलक रहा हो। यह कोई सपना नहीं है, बल्कि जल्द ही हकीकत बनने वाली है। नई दिल्ली के रायसीना हिल पर, जहां अब तक देश की सत्ता के फैसले होते रहे, वहां अब संस्कृति का सबसे बड़ा महाकुंभ सजने जा रहा है।
भारत सरकार के प्रशासनिक केंद्र रहे ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में अब दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय, ‘युगे युगीन भारत म्यूजियम’ (Yuge Yugeen Bharat Museum) बनने जा रहा है। यह संग्रहालय भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का एक वैश्विक केंद्र बनेगा।
म्यूजियम की भव्यता और आकार
‘युगे युगीन भारत म्यूजियम’ रायसीना हिल पर स्थित ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के भीतर विकसित किया जा रहा है। यह संग्रहालय पूरी तरह से 1.55 लाख वर्ग मीटर में फैला होगा, जिसमें 80,000 वर्ग मीटर से अधिक केवल प्रदर्शनी और गैलरी के लिए समर्पित होंगे। यहाँ सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक भारत तक के लगभग 80,000 से 1,00,000 कलाकृतियां और ऐतिहासिक वस्तुएं रखी जाएंगी।
विशेष रूप से यह म्यूजियम पुरानी इमारतों का नया अवतार है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का एडेप्टिव रीयूज किया जाएगा। मंत्रालयों को नए दफ्तरों में शिफ्ट कर दिया गया है, ताकि इन ऐतिहासिक इमारतों की वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए इन्हें एक सांस्कृतिक केंद्र में बदला जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस परियोजना का वीडियो शेयर कर इस बदलाव की झलक साझा की है।

हर साल एक करोड़ से अधिक सैलानी
म्यूजियम का पहला चरण 2026 के अंत तक आम जनता के लिए खोलने की योजना है। इसमें नॉर्थ ब्लॉक में पहली गैलरी प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें भारत की सांस्कृतिक और दार्शनिक गहराई को दर्शाने वाली लगभग 100 प्रमुख कलाकृतियां शामिल होंगी। आगामी तीन वर्षों में म्यूजियम में 30 अलग-अलग थीम पर आधारित गैलरी खोली जाएंगी, जो दर्शकों को भारत की ऐतिहासिक यात्रा और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराएँगी।
अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि जैसे ही यह म्यूजियम पूरी तरह कार्यशील होगा, प्रति वर्ष लगभग 1 करोड़ पर्यटक इसे देखने आएंगे। म्यूजियम में दिव्यांगजनों के लिए सुलभ मार्ग, पर्याप्त पार्किंग, डिजिटल गाइड और इंटरएक्टिव डिस्प्ले जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को जोड़ने के लिए अंडरग्राउंड टनल का निर्माण किया जाएगा, जो एक ‘सांस्कृतिक कॉरिडोर’ के रूप में कार्य करेगा।
यह म्यूजियम केवल कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह नहीं होगा, बल्कि यह भारत की ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और दर्शन की यात्रा का प्रतिनिधित्व करेगा। पौराणिक काल से लेकर आधुनिक युग तक की कला, विज्ञान, स्थापत्य और सांस्कृतिक उपलब्धियों को विश्व के सामने प्रदर्शित करने के लिए यह म्यूजियम एक प्रमुख केंद्र बनेगा।











