आजादी से पहले के चुनावों की हकीकत: सीटों, पैसे और धोखे की राजनीति

आजादी से पहले भारत के चुनावों में जीत के लिए कैसे पार की गईं हदें। जानिए कांग्रेस और मालवीय पार्टी के बीच समझौते की पूरी कहानी

अंग्रेजों की नजर चुनाव पर

आजादी से पहले अंग्रेज गवर्नर चाहते थे कि कांग्रेस हार जाए। उनकी शह पर राजे-महाराजाओं की एग्रीकल्चरिस्ट पार्टी बनी।

किदवई और त्यागी की रणनीति

किदवई ने त्यागी को मालवीय को कांग्रेस से गठबंधन में राजी करने की जिम्मेदारी दी। सीटों का बंटवारा तय करना था।

सीटों का समझौता

मालवीय ने शुरुआत में 15 सीटें मांगी। किदवई ने 25 की पेशकश की और आखिर में 20 सीटों पर सहमति बनी।

छुपकर हुए फैसले

कांग्रेस के उम्मीदवार मालवीय की पार्टी की ओर खिसक गए, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चला। सभी चालाकी से की गई।

पैसों का खेल

कुछ कांग्रेस उम्मीदवारों को मालवीय के टिकट के बदले पांच-दस हजार रुपए दिए गए। चुनाव जीतने के लिए यह कदम जरूरी था।

चालाकी और जीत

त्यागी और किदवई की रणनीति काम आई। समझौते और होशियारी से कांग्रेस ने चुनाव में बहुमत हासिल किया।

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