यह प्रथा केवल धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा पाने का तरीका भी है।
नंगे पैर मंदिर में प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का प्रतीक है।
जूते उतारकर भक्त अहंकार छोड़ते हैं और देवताओं के सम्मान को सुनिश्चित करते हैं।
नंगे पैर प्रवेश भक्त को मंदिर की पवित्रता और धरती से जोड़ता है।
हल्दी, चंदन और सिंदूर जैसे तत्व पैरों से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाते हैं।
मंदिर में नंगे पैर रहकर भक्त तनावमुक्त और अधिक सजग अनुभव करते हैं।
यह सिर्फ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व के कई पवित्र स्थलों में समान महत्व रखती है।