मिडिल ईस्ट में ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी कि अगर जमीनी सेना तैनात की गई तो उन्हें कई ताबूत लौटेंगे। ईरान ने परमाणु स्थल निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने की धमकी भी दी।
World News: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को स्पष्ट चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने बलों को जमीनी स्तर पर तैनात करता है तो उसे इतने ताबूत वापस भेजने होंगे कि ताबूतों की लाइन लग जाएगी। यह बयान सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार जारी कठोर तेवरों का हिस्सा है। ईरान ने अपनी चेतावनी में यह भी कहा कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब कड़ा और निर्णायक होगा।
आयतुल्ला का संदेश, युद्ध की साजिश पर धार्मिक नारा
सरकारी टेलीविजन के माध्यम से ईरान के अयातुल्ला अब्दुल्ला जवादी अमोली का संदेश प्रसारित किया गया। इसमें अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रतिशोध लेने और उनके खून का हिसाब लेने की धमकी दी गई। अयातुल्ला ने कहा कि वर्तमान समय ईरान के लिए एक बड़ी परीक्षा का दौर है और इस दौरान देश की एकता और गठबंधन को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दमनकारी ताकतों के खिलाफ लड़ना उनके धर्म और कर्तव्य का हिस्सा है। यह बयान ईरान के धार्मिक और राजनीतिक ढांचे से जुड़े संदेशों का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका पर टैंकर हमले का आरोप
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा कि अमेरिका ने खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक अमेरिकी टैंकर पर हमला किया और जहाज में आग लग गई। IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य पर आवागमन ईरान के नियंत्रण में रहेगा। हालांकि, अमेरिका ने इस हमले की पुष्टि नहीं की है। ईरान का यह बयान क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त बनाए रखने और समुद्री मार्गों पर दबाव बनाए रखने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टॉरपीडो हमला और उसके परिणाम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वाशिंगटन को बुधवार को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट “डेना” पर टॉरपीडो हमले से अपनी नीति पर पछतावा होगा। इस हमले में युद्धपोत डूब गया और चालक दल के अधिकांश सदस्य मारे गए। यह घटना ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को और बढ़ाने वाली है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत देती है।
जमीनी सेना तैनाती पर धमकी
दक्षिण कोरिया में ईरान के राजदूत सईद कूजेची ने भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में जमीनी सेना तैनात की तो कई ताबूत अमेरिका को वापस भेजे जाएंगे। कूजेची ने कहा कि ईरानी हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले खाड़ी देशों में अपरिहार्य हैं और किसी भी आक्रामक कदम का जवाब ईरान देगा। उनका यह बयान अमेरिका के खाड़ी रणनीतिक स्थलों पर दबाव बनाने और इजरायल और अमेरिका को चेतावनी देने के उद्देश्य से समझा जा रहा है।
इजरायल के परमाणु स्थल को बनाया जाएगा निशाना
ईरानी सैन्य अधिकारी ने बुधवार को अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए को बताया कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरानी सत्ता में बदलाव की कोशिश करते हैं तो देश इजरायल के दिमोना स्थित परमाणु स्थल को निशाना बनाएगा। यह बयान मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को उजागर करता है।
मिडिल ईस्ट में तनाव का बढ़ता असर
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच यह तनाव न केवल सैनिक और रणनीतिक मोर्चे पर दिख रहा है, बल्कि इसके दुष्प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल और गैस की आपूर्ति पर संकट की संभावना है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों और देशों की ऊर्जा नीतियों को प्रभावित कर सकती है।











