भाजपा और विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी ने अमरावती नगर निगम चुनावों से पहले अपना गठबंधन तोड़ दिया है। 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले अमरावती भाजपा जिला अध्यक्ष नितिन धांडे ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अमरावती नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा और विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी (Yuva Swabhimaan Party) के बीच गठबंधन टूट गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष नितिन धांडे ने रविवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की और बताया कि गठबंधन के तहत युवा स्वाभिमान पार्टी को आवंटित छह सीटों पर भाजपा का समर्थन वापस ले लिया गया है। यह कदम युवा स्वाभिमान पार्टी द्वारा भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़े करने के बाद उठाया गया।
भाजपा ने समर्थन वापस लेने की वजह बताई
भाजपा जिला अध्यक्ष नितिन धांडे ने कहा कि इन छह सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी ने भाजपा के वैचारिक रूप से जुड़े स्वतंत्र उम्मीदवारों का विरोध किया और भाजपा के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के दौरान दिए गए वादे का पालन नहीं किया गया। धांडे ने कहा,
'युवा स्वाभिमान पार्टी ने गठबंधन की शर्तों का पालन नहीं किया और हमारी पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारे। इसलिए छह सीटों पर समर्थन वापस लेना पड़ा।'
इस निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नगर निगम चुनाव में भाजपा अब इन छह सीटों पर अलग से चुनाव मैदान में उतरेगी।

गठबंधन टूटने के बाद राजनीतिक असर
अमरावती नगर निगम चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं। गठबंधन टूटने से चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच मत विभाजन और चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है। हालांकि, नितिन धांडे ने यह भी कहा कि राणा की पत्नी और पूर्व लोकसभा सांसद नवनीत राणा भाजपा उम्मीदवारों के प्रचार में सहयोग जारी रखेंगी। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार स्तर पर भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच अभी भी संवाद कायम है।
भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी ने पहले कई चुनावों में सहयोग किया है और अमरावती क्षेत्र में गठबंधन को स्थानीय स्तर पर चुनावी मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। दोनों पार्टियों का यह गठबंधन पहले नगर निगम चुनावों और स्थानीय निकायों में एक सामान्य रणनीति का हिस्सा रहा है। भाजपा द्वारा छह सीटों पर समर्थन वापस लेने का निर्णय इस बात को दर्शाता है कि स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों की रणनीति और सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, गठबंधन टूटने के बाद चुनावी मैदान में प्रतिस्पर्धा और मत विभाजन बढ़ सकता है। युवा स्वाभिमान पार्टी अपने उम्मीदवारों के साथ चुनाव लड़ते हुए भाजपा के वोट बैंक को चुनौती दे सकती है।










