भागलपुर: स्कूल में कुत्ता घुसा तो प्रिंसिपल जिम्मेदार

भागलपुर: स्कूल में कुत्ता घुसा तो प्रिंसिपल जिम्मेदार

बिहार के भागलपुर जिले में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब यदि किसी स्कूल परिसर में आवारा कुत्ता घुसता पाया गया, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल पर तय की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 8 सप्ताह के भीतर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं और स्कूल परिसरों के आसपास उनकी बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्कूल परिसर में कुत्तों का प्रवेश छात्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, इसलिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी समझा गया है।

जिला शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी स्कूल अपने परिसर की चारदीवारी, मुख्य गेट, ग्रिल, जाली और अन्य सुरक्षा इंतजामों की तत्काल जांच करें। जहां कहीं भी कमी हो, उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर ठीक कराया जाए। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन को परिसर और आसपास साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, क्योंकि खुले कचरे और गंदगी से आवारा कुत्तों का जमावड़ा बढ़ता है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 8 सप्ताह की समय सीमा पूरी होने के बाद स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान किसी स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते पाए गए या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी सामने आई, तो संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।

वहीं, इस निर्देश के बाद स्कूल प्रबंधन हरकत में आ गया है। कई स्कूलों ने बाउंड्री वॉल और गेट की मरम्मत शुरू कर दी है, जबकि कुछ स्कूलों ने अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर भी विचार शुरू किया है। अभिभावकों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत होगा।

कुल मिलाकर, भागलपुर में लिया गया यह निर्णय स्कूल परिसरों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि सख्त नियम और स्पष्ट जवाबदेही तय होने से स्कूलों में आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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