भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर नए दावे करता नजर आ रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लगभग सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस दौरान पाकिस्तान लगातार अलग-अलग देशों को मध्यस्थ बताकर बयान बदलता रहा है।
World News: ऑपरेशन सिंदूर को लगभग सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान अब भी विवादों में उलझा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने पहले इस ऑपरेशन में मध्यस्थता की बात कबूल की थी। अब पाक सरकार का दावा है कि चीन ने भी ऑपरेशन सिंदूर में मध्यस्थता की भूमिका निभाई।
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी नेतृत्व लगातार पाकिस्तान के संपर्क में था और उन्होंने भारत से भी संपर्क किया था।
पाकिस्तान का नया दावा: चीन ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीनी नेतृत्व लगातार पाकिस्तान के संपर्क में था और उसने भारत से भी बातचीत की थी। अंद्राबी के अनुसार, चीन के संपर्क में बने रहने से “सकारात्मक कूटनीति” को बढ़ावा मिला और इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में मदद मिली।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि चीन के निरंतर संपर्क से शांति और तनाव में कमी की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी। मध्यस्थता के संदर्भ में चीन का दृष्टिकोण रचनात्मक और संतुलित रहा।” इस बयान को पाकिस्तान द्वारा चीन को खुश करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब बीजिंग और इस्लामाबाद के रणनीतिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं।

ट्रंप के बाद बदला सुर
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी तीसरे देश को भारत-पाक तनाव का श्रेय दिया हो। इससे पहले पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मध्यस्थता की थी। उस समय पाकिस्तान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर काफी चर्चा में रहा था।
हालांकि, भारत ने तब भी साफ कर दिया था कि सीजफायर किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता का नतीजा नहीं था। अब जब पाकिस्तान सात महीने बाद चीन का नाम लेकर नया दावा कर रहा है, तो सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस्लामाबाद बार-बार अलग-अलग वैश्विक शक्तियों को श्रेय क्यों दे रहा है।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत सरकार ने पाकिस्तान के इन ताजा दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए किसी तीसरे देश ने कोई भूमिका नहीं निभाई थी। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने खुद भारत के DGMO से संपर्क कर संघर्ष रोकने का अनुरोध किया था।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि चाहे अमेरिका हो या चीन, किसी भी देश ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थता नहीं की। भारत की नीति हमेशा से यह रही है कि वह पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों को द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाएगा और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।











