भारत रूस से खरीदेगा 300 S-400 मिसाइलें और Su-57 फाइटर जेट, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

भारत रूस से खरीदेगा 300 S-400 मिसाइलें और Su-57 फाइटर जेट, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और इसी कड़ी में एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान रूस से 5 S-400 स्क्वॉड्रन के लिए 300 मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव रख सकता है। 

नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 5 दिसंबर को होने वाली मुलाकात में भारत 5 S-400 स्क्वॉड्रन की मांग करेगा। इसके साथ ही, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को और अधिक सशक्त बनाने के लिए भारत 300 रूसी मिसाइलों की खरीद की योजना भी बना रहा है। बताया जा रहा है कि भारत जल्द ही रूस को इन 300 मिसाइलों के लिए प्रस्ताव का अनुरोध (RFP) जारी करेगा। 

ये मिसाइलें S-400 सिस्टम को रीफिल करने के लिए हैं, जो पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई थीं। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

S-400 मिसाइलें: भारत की हवाई सुरक्षा में वृद्धि

S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे भारत ने ‘सुदर्शन चक्र’ का नाम दिया है, दुनिया के सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों में से एक है। इसका डिजाइन रूस की अल्माज-अंते कंपनी ने किया है। यह सिस्टम विमान, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता और पहुंच असाधारण है। यह 400 किलोमीटर तक लक्ष्यों को मार सकता है और 600 किलोमीटर दूर से लक्ष्यों का पता लगा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि S-400 मिसाइलों की खरीद से भारत की हवाई सुरक्षा और शक्ति में बहुत बड़ा इजाफा होगा। यह कदम विशेष रूप से पाकिस्तान और चीन की सैन्य रणनीति पर दबाव डालने वाला साबित हो सकता है।

Su-57 फाइटर जेट पर विचार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट के 2-3 स्क्वॉड्रन खरीदने पर भी विचार कर रहा है। रूस इसे अमेरिकी एफ-35 लाइटनिंग II के विकल्प के रूप में प्रचारित कर रहा है। एक सूत्र के मुताबिक, Su-57 का यह कदम एक अस्थायी उपाय होगा, जब तक कि भारत का स्वदेशी स्टेल्थ विमान AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 2035 तक तैयार नहीं हो जाता। अभी तक Su-57 या किसी अन्य विकल्प पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन यह भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता और टेक्नोलॉजिकल ताकत को बढ़ाएगा।

भारत-रूस रक्षा संबंध

भारत और रूस के रक्षा संबंध दशकों से मजबूत रहे हैं। S-400 और Su-57 की खरीद से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और भी गहरा होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम न केवल भारत की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान की टेंशन को भी बढ़ाएगा। भारत के लिए S-400 सिस्टम की विशेषताएं:

  • लक्ष्य पहचान दूरी: 600 किलोमीटर
  • मारक क्षमता: 400 किलोमीटर
  • सक्षम लक्ष्य: विमान, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें
  • प्रणाली निर्माता: रूस की अल्माज-अंते कंपनी
  • ऑपरेशन सिंदूर और मिसाइल रीफिल

सूत्रों के मुताबिक, ये 300 नई S-400 मिसाइलें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल हुए सिस्टम को रीफिल करने के लिए खरीदी जा रही हैं। इस कदम का उद्देश्य है कि भारतीय वायुसेना की हवाई सुरक्षा लगातार उच्च स्तर पर बनी रहे।

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