भारत की विदेश और ऊर्जा नीति को लेकर सियासत गरम हो गई है। रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिन का वेवर दिए जाने की खबर के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिन का वेवर दिए जाने के मामले में केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर विपक्ष का हमला तेज हो गया है। Pawan Khera ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।पवन खेड़ा ने कहा कि इस फैसले से भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल उठ रहे हैं, और यह देश के हितों के खिलाफ भी हो सकता है।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार काम कर रही है। उनका कहना था कि इससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रश्न उठ रहे हैं। खेड़ा ने आरोप लगाया कि 28 फरवरी तक सरकार इस मुद्दे पर चुप रही, लेकिन आलोचना बढ़ने के बाद मीडिया में यह खबर आई कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है और सरकार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूएई और अमेरिका जैसे देशों से तेल खरीदने के विकल्प तलाश रही है। उन्होंने कहा कि इन बयानों में रूस का नाम तक शामिल नहीं किया गया।
पेट्रोलियम मंत्री से नहीं मिला स्पष्ट जवाब
पवन खेड़ा ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri से सवाल किया था कि क्या भारत रूस से तेल खरीदेगा, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार, अमेरिका द्वारा 30 दिन का वेवर देना स्वयं में गंभीर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि वेवर आमतौर पर उन्हीं देशों को दिया जाता है जिन पर प्रतिबंध लागू हैं।
खेड़ा ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हुए, लेकिन इसके असर पहले ही दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पहले ही सरकार को इस तरह के समझौतों के प्रति चेतावनी दे चुके हैं।
रणदीप सुरजेवाला ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Randeep Surjewala ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता हर दिन समझौते का शिकार हो रही है। उन्होंने पूछा कि बढ़ती तेल कीमतों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की अनुमति क्यों चाहिए। सुरजेवाला ने याद दिलाया कि पहले अमेरिका ने भारत को ईरान से तेल न खरीदने के लिए कहा, फिर रूस पर प्रतिबंध लगाए, और अब केवल 30 दिन की अनुमति दी जा रही है।
तमिलनाडु और केरल के CM ने जताई नाराजगी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M.K. Stalin ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि अमेरिका केवल 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति देता है, तो यह सवाल उठता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी अन्य देश की मंजूरी क्यों मांगे। उन्होंने कहा कि इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विदेश नीति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि भारत की संप्रभुता किसी विदेशी क्लियरेंस पर निर्भर नहीं हो सकती। उन्होंने इसे दुनिया के सामने अपमानजनक बताया। आईसीपी के राज्यसभा सांसद Sandoz Kumar P ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि भारत की विदेश नीति अपनी मूल अवधारणाओं, गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता से दूर जा रही है।










