BMC Election 2026: संजय राउत के बयान से मिले संकेत, शिवसेना ने शुरुआती रुझानों में ही मानी हार?

BMC Election 2026: संजय राउत के बयान से मिले संकेत, शिवसेना ने शुरुआती रुझानों में ही मानी हार?

मुंबई में BMC चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों के बीच शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके बयान से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी शुरुआती रुझानों से ही नतीजों को लेकर असंतुष्ट है। 

BMC Election 2026: मुंबई में शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने चुनावी रुझानों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके बयान से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी शुरुआती रुझानों से ही नतीजों को लेकर असंतुष्ट नजर आ रही है। संजय राउत ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और इससे लोकतंत्र कमजोर हुआ है।

मतदाता सूची और ईवीएम पर सवाल

संजय राउत ने कहा कि मतदाता सूची से हजारों लोगों के नाम गायब थे। उन्होंने दावा किया कि जिन इलाकों में शिवसेना को मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद थी, वहां मतदान दर्ज नहीं हुआ। इसके अलावा राउत ने कहा कि कई जगह जनता किसी और को वोट दे रही थी, लेकिन ईवीएम में वोट 'कमल' निशान पर दर्ज हो रहा था। इस आरोप के माध्यम से उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि पार्टी शुरुआती रुझानों से ही हार के मूड में है।

संजय राउत ने चुनाव के दौरान खुलेआम पैसे बांटे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता और धन के दबाव में मतदान को प्रभावित किया गया और यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। राउत ने मौजूदा व्यवस्था को ‘सताघारी लोकशाही’ करार देते हुए कहा कि ताकत और पैसा ही चुनाव जीतने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

चुनाव आयोग और प्रशासन पर अप्रत्यक्ष सवाल

राउत ने चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविकता सामने आ सकती है। उनके बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है और विपक्षी दलों ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। संजय राउत के बयान के बाद मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। 

विपक्षी दलों ने भी चुनाव के दौरान हुई अनियमितताओं और वित्तीय दबाव की जांच की मांग की है। कई विश्लेषकों का मानना है कि राउत के बयान का उद्देश्य न केवल शिवसेना के समर्थकों को उत्साहित करना है, बल्कि चुनावी निष्पक्षता पर भी ध्यान खींचना है।

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