Union Budget 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर में उम्मीदें बढ़ गई हैं। सेक्शन 80-IBA और टैक्स राहत की संभावनाओं से अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा मिलने और घर खरीदने वालों के लिए विकल्प बढ़ने की संभावना है।
Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। बजट की तारीख नजदीक आते ही डेवलपर्स, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और घर खरीदने वाले सभी की नजरें सरकार के फैसलों पर टिकी हुई हैं। सेक्टर को उम्मीद है कि इस बार बजट में ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिनसे घर खरीदना सस्ता हो सके और अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) को नई रफ्तार मिले।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। उससे पहले रियल एस्टेट सेक्टर लगातार टैक्स राहत और नीतिगत बदलावों की मांग कर रहा है, ताकि आम लोगों का घर खरीदने का सपना आसान हो सके।
बजट से पहले क्यों अहम है रियल एस्टेट सेक्टर
रियल एस्टेट भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा माना जाता है। यह न सिर्फ हाउसिंग से जुड़ा है, बल्कि कंस्ट्रक्शन, सीमेंट, स्टील, बैंकिंग और रोजगार जैसे कई सेक्टर्स को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
जानकारों का मानना है कि अगर सरकार बजट में रियल एस्टेट को सपोर्ट करती है, तो इससे कंज्यूमर सेंटिमेंट मजबूत होगा और लोग निवेश व खर्च के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे। इससे इकोनॉमी में कैश फ्लो बढ़ेगा और ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।
टैक्स राहत से कैसे बढ़ेगी घरों की डिमांड
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स में राहत और इनकम बढ़ाने वाले कदम रिटेल और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स में मांग को काफी बढ़ा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रियल एस्टेट इंडस्ट्री की प्रमुख मांग यह है कि घर खरीदने वालों को टैक्स में ज्यादा राहत दी जाए। खासकर होम लोन (Home Loan) पर ब्याज में मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की मांग सामने आ रही है।
अगर टैक्स में राहत मिलती है, तो मिडिल क्लास और फर्स्ट टाइम होम बायर्स के लिए घर खरीदना ज्यादा आसान हो जाएगा। इससे अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में नई डिमांड पैदा हो सकती है।
होम लोन और स्टैंप ड्यूटी पर राहत की मांग
मार्केट लीडर्स का मानना है कि होम लोन की ब्याज दरों पर टैक्स छूट बढ़ाने से खरीदारों का भरोसा और मजबूत होगा। इसके साथ ही स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज में कटौती की भी मांग की जा रही है।
कई राज्यों में स्टैंप ड्यूटी ज्यादा होने के कारण खरीदार पीछे हट जाते हैं। अगर बजट में इस दिशा में कोई राहत दी जाती है, तो प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन बढ़ सकते हैं और बाजार में नई जान आ सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से बढ़ेगा भरोसा
जानकारों का कहना है कि सिर्फ टैक्स राहत ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट भी रियल एस्टेट के लिए बेहद जरूरी है। बेहतर सड़कें, मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से रियल एस्टेट की वैल्यू बढ़ती है। अगर बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया जाता है, तो इसका सीधा फायदा हाउसिंग सेक्टर को मिलेगा और खरीदारों का भरोसा और मजबूत होगा।
अफोर्डेबल हाउसिंग पर सरकार से खास उम्मीद
रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे ज्यादा उम्मीद अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर है। इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार इस सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए पुराने टैक्स इंसेंटिव्स को दोबारा लागू करे।
डेवलपर्स का मानना है कि अगर अफोर्डेबल हाउसिंग को सपोर्ट मिलेगा, तो ज्यादा प्रोजेक्ट्स लॉन्च होंगे और लो व मिडिल इनकम ग्रुप के लोगों को घर खरीदने का मौका मिलेगा।
सेक्शन 80-IBA को लेकर क्या है मांग
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 80-IBA रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अहम प्रावधान रहा है। इस सेक्शन के तहत किफायती घरों के डेवलपर्स को 100 प्रतिशत टैक्स छूट मिलती थी।
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि सरकार के पास घरों को किफायती बनाने का यह एक मजबूत और सीधा टूल है। उन्होंने सुझाव दिया है कि सेक्शन 80-IBA के तहत मिलने वाली 100 प्रतिशत टैक्स छूट को फिर से बहाल किया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि यह इंसेंटिव ज्यादा डेवलपर्स को अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
80-IBA क्यों माना जाता है असरदार
सेक्शन 80-IBA के तहत मिलने वाली टैक्स छूट साल 2021 में खत्म हो गई थी। लेकिन जब तक यह लागू रही, तब तक इसने अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट को काफी सपोर्ट किया।
इस इंसेंटिव की वजह से कई डेवलपर्स ने किफायती घरों के प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और घरों की कीमतें कंट्रोल में रहीं।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार इस सेक्शन को दोबारा लागू करती है, भले ही कुछ समय के लिए ही क्यों न हो, तो इसका असर काफी पॉजिटिव रहेगा।
खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को होगा फायदा
अगर बजट 2026 में सेक्शन 80-IBA जैसी स्कीम वापस आती है, तो इसका फायदा सिर्फ डेवलपर्स को ही नहीं, बल्कि घर खरीदने वालों को भी मिलेगा।
ज्यादा प्रोजेक्ट्स आने से विकल्प बढ़ेंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें संतुलित रहेंगी। इससे मिडिल क्लास और लो इनकम ग्रुप के लोगों के लिए घर खरीदना आसान हो सकता है।











