सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में CAT 2025 की आवेदन फीस में 31 प्रतिशत बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाया। सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों की फीस 2,200 रुपये से बढ़कर 2,600 रुपये हुई है, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए यह 1,100 रुपये से 1,300 रुपये हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि फीस का उपयोग परीक्षा संचालन और प्रशासनिक खर्च में होता है और यह किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाती।
CAT Application Fee Hike: देश की प्रमुख मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षा CAT 2025 की फीस में 31 प्रतिशत की वृद्धि ने छात्रों में चिंता पैदा कर दी है। संसद में सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों की फीस 2,600 रुपये, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 1,300 रुपये हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फीस परीक्षा के संचालन, तकनीकी व्यवस्थाओं और प्रशासनिक खर्चों में उपयोग होती है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन और फीस से जुड़ी सभी जानकारी IIM की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित देखें।
फीस में बढ़ोतरी का मामला संसद में उठा
कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) 2025 की आवेदन फीस में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी को लेकर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि साल 2021 की तुलना में सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए आवेदन फीस 2,200 रुपये से बढ़कर 2,600 रुपये हो गई है। वहीं, एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों की फीस 1,100 रुपये से बढ़कर 1,300 रुपये हो गई है।
ओवैसी ने यह भी बताया कि CAT 2025 की फीस, CAT 2024 की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा है। इस साल CAT की परीक्षा 30 नवंबर को आईआईएम कोझीकोड द्वारा आयोजित की गई थी।

सरकार का जवाब और फीस का उपयोग
शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि IIM अधिनियम 2017 के तहत सभी भारतीय प्रबंधन संस्थान अपनी फीस तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि आवेदन फीस का उपयोग परीक्षा के संचालन, प्रशासनिक खर्च, तकनीकी सुविधाओं, परीक्षा केंद्रों और कर्मचारियों की तैनाती में होता है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि CAT की फीस किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाती, क्योंकि परीक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं पहले ही उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर की जाती हैं।
छात्रों के लिए बढ़ती फीस एक चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, CAT की लगातार बढ़ती फीस छात्रों पर वित्तीय दबाव डाल सकती है। हालांकि, शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह बढ़ोतरी परीक्षा के सफल और सुचारु आयोजन के लिए जरूरी है। IIM इस मामले में फीस संरचना की जिम्मेदारी लेते हैं और इसका उपयोग परीक्षा के मानक और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है।











