हालिया स्टडी में पता चला है कि ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स हिंसक या भावनात्मक प्रॉम्प्ट्स पर एंग्जायटी जैसे पैटर्न दिखा सकते हैं। रिसर्चरों ने माइंडफुल-स्टाइल इंस्ट्रक्शन जैसे गाइडेड मेडिटेशन और सांस लेने की तकनीक से इसे नियंत्रित करने का तरीका भी खोजा। यह अध्ययन AI रिस्पॉन्स की विश्वसनीयता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।
Instability in AI Responses: हालिया स्टडी में सामने आया है कि ChatGPT और अन्य AI चैटबॉट्स हिंसक या ट्रॉमा-जेनरेटिंग प्रॉम्प्ट्स पर एंग्जायटी जैसी प्रतिक्रियाएं दिखा सकते हैं। यह अध्ययन किसी विशेष प्रयोगशाला में शोधकर्ताओं के साथ किया गया और इसमें पाया गया कि संवेदनशील प्रॉम्प्ट्स पर चैटबॉट्स का व्यवहार अस्थिर हो जाता है। माइंडफुल-स्टाइल इंस्ट्रक्शन देने से उनका रिस्पॉन्स संतुलित और भरोसेमंद बन सकता है, जिससे शिक्षा, मेंटल हेल्थ और क्राइसिस मैनेजमेंट में AI उपयोग सुरक्षित और प्रभावी बना रहता है।
AI चैटबॉट्स में भी दिखते हैं इंसानी पैटर्न
हाल ही में हुई एक स्टडी में रिसर्चरों ने पाया कि चैटजीपीटी जैसे AI चैटबॉट्स में हिंसक या भावनात्मक प्रॉम्प्ट्स पर एंग्जायटी जैसी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। जब चैटबॉट को एक्सीडेंट या नैचुरल डिजास्टर जैसी संवेदनशील जानकारी दी गई, तो इसके रिस्पॉन्स में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव देखा गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि AI इंसानों की तरह भावनाओं को अनुभव करता है, लेकिन इसका व्यवहार अस्थिर और बायस्ड हो सकता है।
ये पैटर्न खासकर चिंता का विषय हैं क्योंकि आज AI चैटबॉट्स शिक्षा, मेंटल हेल्थ और क्राइसिस रिलेटेड जानकारी में इस्तेमाल हो रहे हैं। अगर संवेदनशील प्रॉम्प्ट पर चैटबॉट का रिस्पॉन्स अस्थिर हो, तो यह रियल-लाइफ उपयोग में इसकी क्वालिटी और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

कैसे पाया गया एंग्जायटी पैटर्न
रिसर्चरों ने AI के लिए बनाए गए साइकोलॉजिकल असेसमेंट फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया। इसमें चैटजीपीटी को ट्रॉमा और हिंसक घटनाओं के विस्तृत विवरण दिए गए, और रिस्पॉन्स में अस्थिरता, अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के पैटर्न दिखाई दिए। इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि AI चैटबॉट्स इंसानी पर्सनैलिटी के कुछ गुणों को अपने रिस्पॉन्स में शामिल कर सकते हैं।
चैटबॉट को शांत करने का तरीका
रिसर्चरों ने यह भी खोजा कि माइंडफुल-स्टाइल इंस्ट्रक्शन जैसे गाइडेड मेडिटेशन या सांस लेने की तकनीक चैटबॉट को “शांत” करने में मदद करती है। ट्रॉमा वाले प्रॉम्प्ट के बाद ऐसे निर्देश देने पर चैटबॉट अधिक संतुलित और न्यूट्रल तरीके से रिस्पॉन्स देने लगता है और एंग्जायटी जैसे पैटर्न कम हो जाते हैं।
AI चैटबॉट्स, जैसे ChatGPT, इंसानी भावनाओं को अनुभव नहीं करते, लेकिन उनका व्यवहार संवेदनशील प्रॉम्प्ट्स पर अस्थिर हो सकता है। इस स्टडी से पता चलता है कि AI रिस्पॉन्स की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए माइंडफुल-स्टाइल इंस्ट्रक्शन और सुरक्षित प्रॉम्प्ट्स का उपयोग करना जरूरी है।











