चीन अपनी बॉर्डर सुरक्षा में एडवांस्ड रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। वियतनाम सीमा पर ह्यूमनॉयड Walker S2 रोबोट्स का ट्रायल किया जाएगा, जिनका काम भीड़ नियंत्रण, पर्यटकों को गाइडेंस देना और प्रशासनिक सहायता प्रदान करना होगा। UBTech Robotics को इसके लिए 330 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। रोबोट AI और मशीनी दिमाग से लैस हैं, जो स्वतः निर्णय लेने में सक्षम हैं।
China Border Robotics Initiative: चीन अपनी बॉर्डर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अगले महीने वियतनाम सीमा पर ह्यूमनॉयड Walker S2 रोबोट्स का ट्रायल शुरू करेगा। UBTech Robotics के साथ मिलकर यह प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा, जिसमें रोबोट्स भीड़ नियंत्रण, प्रशासनिक कार्य और पर्यटकों को गाइड करने में मदद करेंगे। इस कदम से चीन अपनी पब्लिक सर्विस और सुरक्षा प्रबंधन में रोबोटिक्स तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करना चाहता है।
रोबोटिक ट्रायल वियतनाम बॉर्डर पर
चीन ने अपनी बॉर्डर सुरक्षा और पब्लिक सर्विस में एडवांस्ड रोबोटिक्स को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके तहत वियतनाम सीमा पर ह्यूमनॉयड रोबोट का ट्रायल शुरू होगा। इन रोबोट का उद्देश्य बॉर्डर पर भीड़ नियंत्रण, पर्यटकों को गाइडेंस देना और ड्यूटी मैनेजमेंट में मदद करना है। ट्रायल अगले महीने से शुरू होगा और इसे UBTech Robotics के Walker S2 रोबोट के जरिए किया जाएगा।
Walker S2 की तकनीकी खासियत
Walker S2 ह्यूमनॉयड रोबोट की ऊंचाई 1.76 मीटर है और इसमें 52 जॉइंट्स हैं। रोबोट अपने हाथों से 15 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है और लगभग 7 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकता है। इसमें इंसानों की आंखों की जगह दो कैमरे लगे हैं और मशीनी दिमाग इसे स्वतंत्र फैसले लेने में सक्षम बनाता है। रोबोट की बैटरी स्वैप प्रक्रिया केवल तीन मिनट में पूरी हो जाती है, जिससे लगातार काम करना संभव है।

UBTech Robotics का कॉन्ट्रैक्ट और ट्रायल उद्देश्य
UBTech Robotics को इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 330 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। ट्रायल के दौरान इन रोबोट की प्रैक्टिकलिटी और असल दुनिया में उपयोग की क्षमता को परखा जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रोबोट्स कितनी सहजता से बॉर्डर सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में योगदान दे सकते हैं।
भविष्य में बॉर्डर सुरक्षा में रोबोटिक्स का योगदान
चीन की यह पहल रोबोटिक्स और AI तकनीक के मिश्रण से सुरक्षा प्रबंधन को नया आयाम देने की दिशा में कदम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सफल ट्रायल के बाद, ह्यूमनॉयड रोबोट्स का इस्तेमाल अन्य सीमाओं और सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में भी बढ़ सकता है।










