डार्क प्रिंस की 17 साल बाद एंट्री, हवा भवन कैसे बना सत्ता का समानांतर केंद्र? आइए जानें

डार्क प्रिंस की 17 साल बाद एंट्री, हवा भवन कैसे बना सत्ता का समानांतर केंद्र? आइए जानें

बीएनपी नेता तारिक रहमान 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे। ढाका में लाखों समर्थकों ने उनका स्वागत किया। राजनीतिक अस्थिरता और 2026 चुनाव से पहले उनकी वापसी को बड़ा सियासी घटनाक्रम माना जा रहा है।

Dhaka: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान लगभग 17 साल बाद देश लौट आए हैं। उनकी यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद रहमान की घर वापसी को 2026 के आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वापसी

तारिक रहमान की वापसी ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जुलाई में हुए हिंसक नागरिक आंदोलन के बाद शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई। शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चर्चाएं चल रही हैं। इसी राजनीतिक शून्य के बीच रहमान की वापसी ने देश के सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

लाखों समर्थकों का जबरदस्त स्वागत

तारिक रहमान के ढाका पहुंचते ही सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों समर्थक दूर-दराज इलाकों से राजधानी पहुंचे। कई लोग रात भर पैदल चलकर ढाका आए। हाथों में पार्टी के झंडे थे और ‘प्रिंस’ के समर्थन में नारे गूंज रहे थे। यह स्वागत साफ संकेत देता है कि बीएनपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में रहमान को लेकर जबरदस्त उत्साह है।

चुनावी अभियान की शुरुआत

स्वदेश लौटते ही तारिक रहमान ने राजनीतिक संदेश देना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास बांग्लादेश के भविष्य के लिए एक स्पष्ट plan है। इसी के साथ उन्होंने 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए बीएनपी के campaign की शुरुआत कर दी। पार्टी का मानना है कि अगर बीएनपी सत्ता में लौटती है तो रहमान देश की अगली राजनीतिक धुरी बन सकते हैं।

सत्ता से पुराना रिश्ता

तारिक रहमान का सत्ता से नाता नया नहीं है। आलोचकों का दावा रहा है कि 2001 से 2006 के बीच, जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं और बीएनपी-जमात गठबंधन सत्ता में था, उस दौर में असली ताकत तारिक रहमान के हाथों में थी। इसी दौर में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाने लगा।

हवा भवन बना सत्ता का समानांतर केंद्र

उस समय तारिक रहमान ढाका के एक दो मंजिला भवन से काम करते थे, जिसे हवा भवन कहा जाता था। कागजों में यह उनका निजी ऑफिस था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे Shadow PMO कहा जाता था। कई वरिष्ठ अधिकारी, राजनयिक और खुफिया एजेंसियों के लोग मानते थे कि सरकार के कई बड़े फैसले हवा भवन से ही तय होते थे।

हवा भवन को लेकर गंभीर आरोप

बीएनपी-जमात सरकार के पतन के बाद हवा भवन को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और मीडिया में यह दावा किया गया कि 2004 में शेख हसीना पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश हवा भवन में रची गई थी। हालांकि बीएनपी ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया और उन्हें राजनीतिक साजिश बताया।

हथियार तस्करी के आरोप

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि हवा भवन एक बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का केंद्र था। आरोप था कि यहां से असम के ULFA जैसे अलगाववादी संगठनों को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किया जाता था। इन आरोपों ने तारिक रहमान की छवि को और विवादास्पद बना दिया।

2006 से 2008 का संकट काल

2006 से 2008 का दौर बांग्लादेश के लिए बेहद अस्थिर रहा। बीएनपी और अवामी लीग के बीच चुनाव को लेकर टकराव बढ़ गया। इसी दौरान एक Military-backed caretaker government बनी, जिसने कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगाई। इस सरकार का मकसद दोनों प्रमुख नेताओं के बिना नया राजनीतिक विकल्प तैयार करना था, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हो सका।

मई 2007 में केयरटेकर सरकार ने तारिक रहमान को गिरफ्तार कर लिया। उन पर भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और money laundering जैसे कई आरोप लगाए गए। उन्हें करीब 17 महीने तक हिरासत में रखा गया। बीएनपी का कहना रहा कि ये सभी मामले राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज किए गए थे।

2008 में मेडिकल ट्रीटमेंट के नाम पर तारिक रहमान को लंदन जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद वे लंबे समय तक वहीं रहे और बांग्लादेश की राजनीति से दूर रहे। करीब 17 साल के इस वनवास ने उन्हें रहस्यमयी नेता बना दिया, लेकिन पार्टी के अंदर उनका प्रभाव बना रहा।

2026 चुनाव में बड़ी भूमिका

अब जब तारिक रहमान लौट आए हैं, तो 2026 के आम चुनाव में उनकी भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। बीएनपी ने खालिदा जिया की सीट से नामांकन की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि रहमान उसी पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जहां से खालिदा जिया 1991 से 2018 तक सांसद रहीं।

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