भारत ने 6 से 8 दिसंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण की संभावना जताई है। इस दौरान 1400 किलोमीटर क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित की है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए NOTAM जारी किया गया।
New Delhi: भारत ने 6 से 8 दिसंबर 2025 के बीच बंगाल की खाड़ी में संभावित मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है। इस दौरान 1400 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। सुरक्षा कारणों और उड़ानों की सतर्कता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षण में लंबी दूरी की और शक्तिशाली मिसाइलों का इस्तेमाल हो सकता है। 1400 किलोमीटर से अधिक की उड़ान सीमा इस बात का संकेत है कि यह मिसाइल रणनीतिक और उच्च क्षमता वाली हो सकती है।
क्या है NOTAM
NOTAM का पूरा नाम Notice to Airmen है। यह एक ऐसा आधिकारिक नोटिस होता है, जिसे वायु सेना और नागरिक उड़ानों की सुरक्षा के लिए जारी किया जाता है। सामान्यतः यह युद्धाभ्यास, असामान्य परिस्थितियों या मिसाइल परीक्षण के दौरान जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उड़ान क्षेत्र में किसी भी तरह का खतरा न हो और सभी हवाई गतिविधियां सुरक्षित रहें।
इस तरह का NOTAM पायलटों और एयरलाइन कंपनियों को सचेत करता है कि निर्दिष्ट क्षेत्र में उड़ान प्रतिबंधित है। भारत के लिए यह मिसाइल परीक्षण की तैयारी और सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षण
भारत लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं का परीक्षण कर रहा है। इससे पहले 15 से 17 अक्टूबर 2025 के बीच भी बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM जारी किया गया था। इस दौरान लगभग 1,480 किलोमीटर लंबा इलाका नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया।
इसके अलावा, 24 और 25 सितंबर को भी बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण हुआ था। यह परीक्षण अब्दुल कलाम आइलैंड से किया गया था और इसके लिए भी विशेष सुरक्षा नोटिस जारी किया गया। ये लगातार परीक्षण भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत और तैयारियों को दर्शाते हैं।
भारत की बढ़ती मिसाइल ताकत
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने DRDO के माध्यम से लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के विकास में जबरदस्त प्रगति की है। इन मिसाइलों की क्षमता और सटीकता ने भारत की क्षेत्रीय ताकत और सैन्य क्षमता को मजबूत किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे परीक्षण भारत की रणनीतिक ताकत बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और पड़ोसी देशों की गतिविधियों के बीच यह कदम देश की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को और मजबूत करता है।











