विपक्षी नेताओं ने गुरुवार रात संसद परिसर में 12 घंटे का धरना प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने वीबी-जी रामजी विधेयक के पारित होने का विरोध किया। उनका कहना है कि यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत चल रहे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम को प्रतिस्थापित करने का प्रयास करता है।
नई दिल्ली: भारत की संसद में गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब विपक्षी दलों ने विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G विधेयक के विरोध में संसद परिसर में 12 घंटे का धरना दिया। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त करने का प्रयास है।
धरना प्रदर्शन गुरुवार रात शुरू हुआ और शुक्रवार सुबह तक जारी रहा। इसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर गरीब, किसान और श्रमिक विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को देशभर में सड़कों तक ले जाया जाएगा।
आधी रात के बाद राज्यसभा से पारित हुआ विधेयक
विपक्ष के तीव्र विरोध के बावजूद, VB-G RAM G विधेयक 2025 को संसद से पारित कर दिया गया। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी आधी रात के बाद इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि नया मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को “अधिक प्रभावी और टिकाऊ” बनाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे एमजीएनआरईजीए को कमजोर या समाप्त करने की साजिश बता रहा है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने धरने के दौरान कहा कि मोदी सरकार ने एमजीएनआरईजीए को खत्म कर देश के गरीबों से उनका सुरक्षा कवच छीन लिया है। उन्होंने कहा, हम 12 घंटे का धरना इसलिए दे रहे हैं क्योंकि जनविरोधी सरकार ने NREGA को समाप्त कर दिया है। यह न सिर्फ गरीबों की आजीविका पर हमला है, बल्कि महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्वों का भी अपमान है। NREGA देश के सबसे कमजोर वर्गों के लिए जीवन रेखा था।

कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस दिन को “भारत के श्रम बल के लिए सबसे दुखद दिन” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एमजीएनआरईजीए को रद्द कर करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका को खतरे में डाल दिया है। सुरजेवाला ने कहा,यह फैसला साबित करता है कि भाजपा सरकार किसान विरोधी और गरीब विरोधी है। रोजगार की गारंटी देने वाली योजना को खत्म करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
एमजीएनआरईजीए वर्ष 2005 में लागू की गई थी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में गिना जाता है। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने का कानूनी अधिकार था। महामारी और आर्थिक संकट के दौरान इस योजना ने करोड़ों परिवारों को आय का सहारा दिया।












