हम अक्सर लोगों को उनके बाहरी रूप-रंग, कपड़ों या हैसियत से आंकते हैं। लेकिन सच यह है कि इंसान की असली कीमत उसके अंदर के गुणों से होती है, न कि बाहरी दिखावे से। यह छोटी सी कहानी इसी बड़ी बात को एक गुब्बारे के उदाहरण से बहुत सरलता से समझाती है।
मुख्य कहानी
एक बार की बात है, एक शहर में एक बड़ा मेला लगा हुआ था। मेले में एक गुब्बारे वाला था जो रंग-बिरंगे गुब्बारे बेचकर अपनी रोजी-रोटी कमाता था। उसके पास लाल, नीले, पीले, हरे और काले, हर रंग के चमकदार गुब्बारे थे।
जब भी उसकी बिक्री थोड़ी कम होने लगती, तो वह भीड़ का ध्यान खींचने के लिए एक तरकीब अपनाता। वह अपने पास रखे हीलियम गैस (Helium Gas) के सिलेंडर से एक गुब्बारे में गैस भरता और उसे हवा में छोड़ देता। गुब्बारा जब आसमान में ऊपर की तरफ उड़ता, तो उसे देखकर बच्चे बहुत खुश होते और गुब्बारे खरीदने के लिए उसके पास दौड़ पड़ते। उसकी बिक्री फिर से बढ़ जाती।
वह दिन भर यही करता रहा। कभी लाल गुब्बारा छोड़ता, कभी पीला, तो कभी नीला।
एक छोटा सा बच्चा, जिसका रंग थोड़ा सांवला था, काफी देर से एक कोने में खड़ा होकर यह सब बड़े ध्यान से देख रहा था। उसके मन में एक सवाल कुलबुला रहा था।
जब उसे रहा नहीं गया, तो वह धीरे-धीरे चलकर गुब्बारे वाले के पास पहुँचा। उसने गुब्बारे वाले का कुर्ता पीछे से खींचा।
गुब्बारे वाले ने मुड़कर देखा तो एक मासूम सा बच्चा खड़ा था। उसने पूछा, 'क्या हुआ बेटा? तुम्हें गुब्बारा चाहिए?'
बच्चे ने बड़ी जिज्ञासा भरी नजरों से गुब्बारे वाले की तरफ देखा और एक बहुत ही मासूम सवाल पूछा। उसने कहा, 'अंकल, मैंने देखा कि आपने लाल गुब्बारा छोड़ा, वह उड़ गया। पीला छोड़ा, वह भी उड़ गया। नीला भी उड़ गया।'
बच्चा थोड़ा रुका और फिर उसने पास में रखे एक काले रंग के गुब्बारे की तरफ इशारा करते हुए पूछा, 'लेकिन अंकल, अगर आप यह 'काला' वाला गुब्बारा हवा में छोड़ेंगे, तो क्या वह भी उड़ेगा?'
बच्चे का सवाल सुनकर गुब्बारे वाला एक पल के लिए हैरान रह गया। उसे समझ आ गया कि बच्चे के मन में क्या चल रहा है। शायद उस बच्चे को अपने रंग को लेकर कोई हीन भावना थी।
गुब्बारे वाला मुस्कुराया। उसने बड़े प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ फेरा और उसे जीवन की सबसे बड़ी सीख दी।
उसने कहा, 'बेटा! यह गुब्बारा अपने रंग की वजह से नहीं उड़ रहा है। यह काला हो या गोरा, लाल हो या पीला, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह तो उस चीज की वजह से ऊपर जा रहा है जो इसके 'अंदर' भरी है।'
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता हमारे बाहरी रंग-रूप या पहनावे से नहीं मिलती। जैसे एक गुब्बारा अपने रंग की वजह से नहीं, बल्कि अपने अंदर भरी 'हवा' से उड़ता है, ठीक वैसे ही इंसान अपने आंतरिक गुणों, चरित्र, ज्ञान और सकारात्मक सोच की बदौलत ही जीवन की ऊंचाइयों को छूता है। असली शक्ति हमारे भीतर होती है।













