दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध निर्माण हटाने के लिए MCD ने आधी रात बुलडोजर कार्रवाई की। हाई कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई के दौरान पथराव हुआ, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
New Delhi: राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बुधवार तड़के बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला। फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध निर्माण को हटाने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बुलडोजर कार्रवाई की। यह अभियान दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर चलाया गया। रामलीला मैदान के नजदीक हुई इस कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए, जब कुछ शरारती तत्वों ने पथराव कर दिया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
हाई कोर्ट के आदेश पर चला बुलडोजर
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायिक निर्देशों के तहत की गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट आदेश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने योजना बनाकर अवैध ढांचों को हटाने का फैसला किया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध निर्माण के खिलाफ था। नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए ढांचों को हटाना इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य था।
फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हटाया गया अतिक्रमण
यह कार्रवाई तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के इलाके में की गई। अधिकारियों के मुताबिक, यहां लंबे समय से अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। जगह-जगह अस्थायी और पक्के ढांचे खड़े कर दिए गए थे, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा था, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। एमसीडी ने पहले नोटिस जारी किए थे, लेकिन आदेशों का पालन न होने पर आखिरकार बुलडोजर एक्शन का सहारा लेना पड़ा।
17 बुलडोजरों के साथ चला अभियान
अवैध ढांचों को हटाने के लिए एमसीडी ने करीब 17 बुलडोजर मौके पर तैनात किए थे। आधी रात के बाद शुरू हुए इस अभियान में बड़ी संख्या में निगम कर्मी शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि सुबह के समय भीड़ और ट्रैफिक से बचने के लिए तड़के कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।
कानून व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात
कार्रवाई से पहले दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। पूरे इलाके को नौ जोन में बांटा गया था। हर जोन की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Additional DCP) रैंक के अधिकारी को दी गई थी। संवेदनशील प्वाइंट्स पर अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई थी। पुलिस का मकसद साफ था कि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जाए और कानून व्यवस्था बनी रहे।
अमन कमेटी के साथ पहले हुई थीं बैठकें

दिल्ली पुलिस के अनुसार, कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों और अमन कमेटी के सदस्यों के साथ कई समन्वय बैठकें की गई थीं। इन बैठकों का उद्देश्य लोगों को भरोसे में लेना और शांति बनाए रखना था। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है और इसमें सहयोग की जरूरत है। इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
पथराव से मची अफरा-तफरी
अतिक्रमण हटाने के दौरान अचानक कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर पथराव कर दिया। इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पत्थरबाजी में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस के अनुसार, स्थिति को जल्दी भांपते हुए हल्का बल प्रयोग किया गया, जिससे हालात पर काबू पा लिया गया।
स्थिति को तुरंत किया गया नियंत्रित
दिल्ली पुलिस का कहना है कि पथराव की घटना के बावजूद हालात ज्यादा नहीं बिगड़े। सुरक्षा बलों ने तेजी से मोर्चा संभाला और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। पूरे अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे। कुछ समय के भीतर ही इलाके में सामान्य स्थिति बहाल कर दी गई।
पुलिस का आधिकारिक बयान
केंद्रीय रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि दिल्ली पुलिस कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सभी न्यायिक निर्देशों को कानूनी, पेशेवर और संवेदनशील तरीके से लागू किया जा रहा है। पथराव की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन पुलिस ने संयम बरतते हुए हालात को संभाला।
अवैध निर्माण पर सख्ती का संकेत
इस कार्रवाई को दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का पालन हर हाल में किया जाएगा। चाहे कितनी भी चुनौती क्यों न हो, नियमों के खिलाफ बने ढांचों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। इससे पहले भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ लोगों ने कोर्ट के आदेश के पालन को सही ठहराया, तो वहीं कुछ ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत की गई कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया।











