ISRO स्पेस मिशन में योगदान के लिए Ankur Garg को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, जानें कौन हैं वे

ISRO स्पेस मिशन में योगदान के लिए Ankur Garg को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, जानें कौन हैं वे

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के 33 वर्षीय अंकुर गर्ग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया। ISRO के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर में वैज्ञानिक अंकुर ने Oceansat-3, Cartosat-2S और Resourcesat जैसे प्रमुख मिशनों में योगदान दिया। उनका करियर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

नेशनल साइंस अवार्ड 2025: मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ग्राम बिछिया निवासी 33 वर्षीय अंकुर गर्ग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 में नेशनल साइंस अवार्ड से सम्मानित किया। वे अहमदाबाद स्थित ISRO के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर में वैज्ञानिक हैं और Oceansat-3, Cartosat-2S, Resourcesat जैसे प्रमुख मिशनों में योगदान दे चुके हैं। बचपन से अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले अंकुर ने IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई की और ISRO की परीक्षा में AIR 1 हासिल कर SAC में शामिल हुए।

राष्ट्रपति से सम्मानित हुए ISRO वैज्ञानिक अंकुर गर्ग

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ग्राम बिछिया निवासी 33 साल के अंकुर गर्ग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया। उन्हें स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया। राष्ट्रपति ने हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ कार्य करने वाले 24 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया, जिसमें अंकुर गर्ग की भी सूची शामिल है।

अंकुर गर्ग इस समय अहमदाबाद स्थित ISRO के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC) में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। उनका योगदान भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों में अहम माना जाता है। यह उपलब्धि उन्हें देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनाती है।

पढ़ाई और करियर की शुरुआत

अंकुर गर्ग की प्रारंभिक शिक्षा मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुई। उन्होंने महर्षि विद्या मंदिर से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की।

2013 में उन्होंने GATE में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और IIT कानपुर में कंप्यूटर साइंस में प्रवेश लिया। इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा के दौरान उनके मन में हमेशा अंतरिक्ष और स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर जिज्ञासा बनी रही। बचपन से ही उन्होंने तारों और अंतरिक्ष के रहस्यों में गहरी रुचि दिखाई।

ISRO में उल्लेखनीय योगदान

ISRO में शामिल होने के बाद अंकुर गर्ग ने Oceansat-3, Cartosat-2S और Resourcesat जैसे राष्ट्रीय महत्व के मिशनों पर काम किया। वर्तमान में वे TRISHNA और G20 सैटेलाइट परियोजनाओं के लिए एल्गोरिदम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं।

उनकी मेहनत और प्रतिभा को पहले भी विज्ञान युवा शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा चुका है। अंकुर गर्ग का करियर इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी ज्ञान और लगन से अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।

बचपन का सपना और प्रेरणा

अंकुर गर्ग बताते हैं कि बचपन में वे अक्सर तारों को देखकर सोचते थे कि वे कैसे बने और उनके पीछे क्या रहस्य हैं। इस जिज्ञासा ने उन्हें स्पेस मिशनों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। चंद्रयान, मंगलयान और IRNSS जैसे बड़े मिशनों की मीडिया कवरेज ने उनके सपनों को और आकार दिया।

IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस की डिग्री पूरी करने के बावजूद उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रस्ताव को ठुकराकर ISRO की परीक्षा दी। इस परीक्षा में उन्हें AIR 1 प्राप्त हुआ और वे SAC में वैज्ञानिक के रूप में शामिल हुए।

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