झालावाड़ में यूरिया संकट गहराया: घंटों लाइन में खड़े किसान खाली हाथ लौटे

झालावाड़ में यूरिया संकट गहराया: घंटों लाइन में खड़े किसान खाली हाथ लौटे

झालावाड़ में यूरिया खाद की भारी कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुबह से देर शाम तक लंबी लाइनों में खड़े रहने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। इस संकट के कारण खेती का महत्वपूर्ण सीजन खतरे में पड़ता दिख रहा है।

Jaipur: राजस्थान के झालावाड़ जिले में यूरिया खाद की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। कृषक सुबह से लेकर देर शाम तक वितरण केंद्रों के बाहर लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकांश किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। कई किसान तीन-तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी उन्हें खाद नहीं मिल रही। 

किसानों ने आरोप लगाया है कि सप्लाई में देरी और सरकारी वितरण व्यवस्था कमजोर होने के कारण ब्लैक मार्केटिंग बढ़ गई है, जहां मनमानी कीमतें वसूली जा रही हैं। प्रशासन ने एक आधार कार्ड पर दो बोरी की सीमा तय की है, लेकिन उपलब्धता न होने से यह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं हो रही। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने पर फसलें खराब हो जाएंगी और उनकी आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

लंबी लाइनों के बाद भी खाली हाथ लौटे किसान

झालावाड़ जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति लगातार कम होती जा रही है। गांवों से किसान बसों और निजी वाहनों से शहर पहुंचते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिल पा रही। कई किसानों ने बताया कि वे तीन दिन से केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, पर हालात जस के तस हैं।

ब्लैक मार्केटिंग के आरोप, बढ़ती दिक्कतें

किसानों का कहना है कि सरकारी सप्लाई कम होने का फायदा उठाकर कुछ लोग खाद को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। आरोप है कि आधिकारिक वितरण बंद होते ही बाजार में अचानक खाद उपलब्ध हो जाती है, वह भी महंगे दामों पर। इससे किसानों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।

सख्त सीमाएं भी बेअसर साबित

प्रशासन ने एक आधार कार्ड पर प्रतिदिन सिर्फ दो बोरी देने की सीमा तय की है। लेकिन जब खाद ही उपलब्ध नहीं है, तो इस नियम का कोई फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा। जिन किसानों को 10 बोरी की जरूरत है, वे पांच दिन तक लाइन में लगने को मजबूर हैं, वो भी तब जब प्रतिदिन खाद मिले—जो कि नहीं मिल रही।

सरकारी आश्वासन पर उठने लगे सवाल

किसानों का कहना है कि सरकार और प्रशासन लगातार सप्लाई सुधारने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बिल्कुल उलट है। जिले में पहले भी कमी की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का विश्वास सरकारी दावों से कमजोर होता दिख रहा है।

समय पर खाद न मिली तो बर्बाद होंगी फसलें

यूरिया की कमी ने खेती-बाड़ी के महत्वपूर्ण समय में संकट खड़ा कर दिया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई और खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो फसलें सूख जाएंगी और उनकी आय पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से तुरंत जांच, कार्रवाई और सही वितरण की मांग की है।

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