जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग से सियासी भूचाल आ गया। उमर अब्दुल्ला ने कुछ विधायकों पर भाजपा को वोट देने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने कहा कि वोट उसकी नीतियों से प्रभावित होकर मिले हैं। निर्दलीयों ने जांच की मांग की।
Jammu-Kashmir: राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा तूफान ला दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खुलकर आरोप लगाया है कि कुछ विधायकों ने उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के साथ धोखा किया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वोट दिया। इस घटना के बाद सत्ताधारी गठबंधन में दरार गहराती दिख रही है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और अन्य सहयोगी दलों ने नेकां (NC) पर सवाल उठाए हैं, जबकि निर्दलीय विधायकों ने खुद पर लगे आरोपों की जांच की मांग की है।
भाजपा की "गुगली" में फंसे सहयोगी दल
श्रीनगर में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति ने विपक्षी खेमे को हिला दिया। भाजपा को रोकने के नाम पर एकजुट हुए दल अब आपस में ही भिड़ गए हैं। सात वोटों के खिसकने से पूरा समीकरण बदल गया। उमर अब्दुल्ला ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह खाते हमारे रहे और वोट भाजपा को दे आए।”
राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए इस चुनाव से पहले नेकां ने सभी छोटे दलों और निर्दलीयों को साथ लेकर 59 विधायकों का समर्थन जुटाने का दावा किया था। लेकिन मतदान के नतीजों ने पूरी तस्वीर बदल दी।
भाजपा के 28 विधायक, मिले 32 वोट
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 88 सदस्य हैं। इनमें से 28 विधायक भाजपा के हैं। इसके बावजूद भाजपा को चुनाव में 32 वोट मिले। यानी चार अतिरिक्त वोट भाजपा के पक्ष में गए। वहीं तीन वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। नतीजा यह हुआ कि चारों सीटें जीतने का सपना देख रही नेकां को केवल तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा। चौथी सीट भाजपा के खाते में चली गई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “कुछ जाने-पहचाने चेहरों ने हमें धोखा दिया है। उनके नाम सभी को मालूम हैं, लेकिन मैं दोहराना नहीं चाहता।”
विपक्ष ने उमर पर साधा निशाना
पीडीपी ने उमर अब्दुल्ला के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि सवाल उनकी पार्टी के विधायकों पर भी उठ रहे हैं। पीडीपी विधायक वहीद उर रहमान परा ने कहा, “नेकां के पक्ष में मतदान करना हमारे लिए आसान नहीं था, लेकिन हमने जम्मू-कश्मीर के हित में साथ दिया। अब अगर उमर अब्दुल्ला आरोप लगा रहे हैं तो उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि उनकी पार्टी पर भी उंगलियां उठ रही हैं।”
परा ने आगे कहा कि पीडीपी ने नेकां के समर्थन का वादा भूमि अधिकार (Land Rights) और दैनिक वेतनभोगियों से संबंधित विधेयक पर समर्थन के लिए किया था। “अब नेकां की जिम्मेदारी है कि वे विधानसभा सत्र में इन विधेयकों को पारित कराएं।”

सज्जाद लोन का पलटवार – “नेकां ने खुद की क्रॉस वोटिंग की”
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने उमर अब्दुल्ला पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उन्हें पता है किसने क्रॉस वोटिंग की। अगर उन्हें नाम पता हैं तो सार्वजनिक करें। असलियत यह है कि नेकां ने खुद अपने सात विधायकों के वोट भाजपा को उपहार में दिए हैं।”
लोन ने कहा कि यह पूरा चुनाव एक “फिक्स्ड मैच” था जिसमें नेकां और भाजपा दोनों शामिल थे। “नेकां अब हार का ठीकरा दूसरों के सिर पर फोड़ रही है।”
भाजपा का पलटवार – “विधायकों ने हमारी नीतियों से प्रभावित होकर वोट दिया”
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष युद्धवीर सेठी ने कहा कि विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर वोट दिया। उन्होंने कहा, “नेकां को यह बताना चाहिए कि उसके 41 विधायकों के रहते हुए उसे 58 वोट कहां से मिले। मुख्यमंत्री को आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।”
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह जन समर्थन का परिणाम है, न कि कोई सियासी साजिश। उन्होंने इसे “सत्य की जीत” बताया और पार्टी कार्यालयों में जश्न मनाया गया।
उमर अब्दुल्ला का जवाब – “हमें धोखा दिया गया”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी ने राज्यसभा की चारों सीटें जीतने के लिए पूरी मेहनत की। “हमारे लिए यह चुनाव खुशी और गम दोनों लेकर आया। हमें तीन सीटें जीतने का भरोसा था, फिर भी चौथी के लिए कोशिश की। लेकिन कुछ लोगों ने हमें नीचा दिखाया और धोखा दिया।
उन्होंने कहा कि “ये लोग हमारी बैठकों में आते रहे, खाते हमारे रहे, लेकिन वोट भाजपा को दे आए। अब यह साफ हो गया है कि कौन हमारे साथ खड़ा था और कौन हमारे खिलाफ गया।”
कांग्रेस और सहयोगियों को धन्यवाद
उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के किसी भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग नहीं की। सज्जाद लोन जैसे नेता जो आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपने रुख को साफ करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का समर्थन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अहम था। “हम भाजपा की विचारधारा से असहमत हैं और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए साथ आए थे।”
निर्दलीयों ने मांगी जांच
इसी बीच निर्दलीय विधायकों ने अपनी निष्ठा पर उठे सवालों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वे पहले दिन से गठबंधन के साथ थे और आज भी हैं। निर्दलीयों ने मांग की है कि क्रॉस वोटिंग के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आए।
इंद्रवाल के निर्दलीय विधायक प्यारेलाल शर्मा ने कहा, “हम नेकां के साथ थे और आज भी हैं। भाजपा यह दुष्प्रचार कर रही है। हमें गर्व है कि नेकां ने हमारे क्षेत्र के नेता सज्जाद किचलू को राज्यसभा भेजा।”
बनी के निर्दलीय विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री का इशारा हमारे प्रति है तो उन्हें जांच करवानी चाहिए। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। सरकार को उन चेहरों को बेनकाब करना चाहिए जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है।”












